उत्तराखंड के चमोली जिले की वादियों में घूमने आए जर्मनी के 11 सदस्यीय दल को यहां के रीति-रिवाज, बोली-भाषा और हस्तशिल्प खूब भाया. छह दिनों तक पर्यटक स्थलों के सैर-सपाटे के बाद पर्यटको ने ग्रामीणों से रिंगाल की टोकरियां भी खरीदीं और उन्होंने प्राथमिक विद्यालय कुजौं-मैकोट में उन्होंने स्कूली बच्चों को बैग, कॉपियां, पेंसिल व अन्य सामग्री भी बांटी.

जर्मनी से 11 सैलानियों का दल गोपेश्वर के समीप रौली-ग्वाड़ गांव में स्थित होम स्टे में ठहरने के लिए आया था. यह दल बचन चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष पूनम रावत और संरक्षक तुलसी रावत के जरिए यहां पहुंचा. ट्रस्ट ने सैलानियों को डुंगरी और कुजौं-मैकोट गांव में हस्पशिल्प कला से रूबरू कराया.

छह दिनों तक क्षेत्र में घूमने के बाद सैलानियों का दल रविवार को लौट गया. जर्मनी की मलीना ने ग्रामीणों से अगले वर्ष ग्रुप के साथ दोबारा आने का वायदा किया.





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