• कोतवाली देहरादून में दी गयी तहरीर 
  • निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधकों पर जालसाजी का आरोप 
  • करोड़ों रुपए की बंदरबांट का ठेकेदार ने लगाया आरोप 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ सहित उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की सरकारों के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का मखौल उत्तरप्रदेश राजकीय निर्माण निगम किस तरह उत्तराखंड में उड़ा रहा है इसकी पोल खुद निर्माण निगम के ठेकेदार ने खोली ही नहीं बल्कि निर्माण निगम में चल रहे घपले घोटालों की एक लम्बी फहरिस्त की जानकारी और निर्माण निगम के खिलाफ न्यायालय के आदेश के बाद एक रिपोर्ट भी देहरादून कोतवाली को दी है जिसमें उसने खुद के शोषण का आरोप भी निर्माण निगम के अधिकारियों पर लगाया है। 

बीती 27 अक्टूबर को देहरादून कोतवाली में न्यायालय के आदेश के बाद दी गयी रिपोर्ट में उत्तरप्रदेश राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों द्वारा  उसके साथ किये गए घपले -घोटाले के सम्बन्ध में ठेकेदार मोहम्मद आरिफ में कहा है कि उसने कार्य आदेश संख्या 04 दिनांक 10 फ़रवरी 2017 को आंकलित 50 लाख  रुपये और आदेश संख्या 08 दिनांक 25 फ़रवरी 2017 के अनुसार 65 लाख 83 हज़ार 248 रूपये ,तथा कार्यादेश संख्या 09 दिनांक 25 फरवरी 2017 के अनुसार 61 लाख 56 हज़ार 412 रुपये  सहित कई और कार्य दिए गए।  और भुगतान भी किये जाते रहे।  ठेकेदार ने कहा है कि जीएसटी लागू होने से पहले निर्माण निगम द्वारा कार्य करने वाले ठेकेदारों को सीधे बैंक खाते  में भुगतान किया जाता रहा था लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद ठेकेदार को बिल बनाना अनिवार्य कर दिया गया और बिल देने पर ही  भुगतान अनिवार्य कर दिया गया।  हालाँकि जीएसटी लागू होने के शुरूआती दिनों में दो-तीन बिल खुद ही बनाये जाने के दौरान गलतियां होने पर तत्कालीन परियोजना प्रबंधक सतीश कुमार उपाध्याय द्वारा यह कहकर बिल बुक ले ली गयी कि वह स्वयं सही -सही बिल बनाकर अपने कार्यालय मे देंगे ,लहज़ा विश्वास कर हमने परियोजना प्रबंधक को आरिफ कंस्ट्रक्शन की बिल बुक उनको दे दी। वहीँ अपनी शिकायत में ठेकेदार ने कहा है इसके बाद निर्माण निगम के अधिकारियों द्वारा बिल बनाकर भुगतान भी किया जाता रहा और अधिक भुगतान बताकर हमसे नकद पैसे भी वापस लिए जाते रहे। मामला तब खुला जब ठेकेदार के चार्टर्ड अकाउंटेंट ने उसे बताया कि आपके खाते से भारी धनराशि जमा किया जाना और निकलना मौजूद है जिसपर नए नियम के अनुसार जीएसटी देना पड़ेगा।  इसके बाद ठेकेदार द्वारा खोजबीन की गयी तो पता चला निर्माण निगम के अधिकारी बिल बुक का दुरपयोग करने के साथ ही ठेकेदार को धोखे में रखते हुए खाते से नकदी निकलवाते रहे।

शिकायत में ठेकेदार ने कहा है कि समय -समय पर निर्माण निगम के इकाई कार्यालय रुड़की के पारियोजना प्रबंधकों द्वारा किये गए कार्य की माप-जोख करके माप पुस्तिका (एमबी) में दर्ज की गयी लेकिन प्रार्थी को यह माप पुस्तिका नहीं दिखायी गयी और न ही इस पुस्तिका पर नियमानुसार ठेकेदार के हस्ताक्षर ही करवाए गए। लिहाज़ा ठेकेदार को आज तक यह पता  नहीं कि वास्तविक रूप से कितनी धनराशि का भुगतान हुआ और कितना कार्य का बिल स्वीकृत हुआ। वहीं ठेकेदार को परियोजना प्रबंधकों द्वारा समय -समय यह कहकर पैसे लिए जाते रहे कि भुगतान ज्यादा किया गया है।  इतना ही नहीं परियोजना प्रबंधकों द्वारा अकारण ही ठेकेदार के खाते में भारी धनराशि जमा कराई गयी और उसके बाद कहा गया कि हमने अतिरिक्त धनराशि जमा करवा दी है जिसे निकालकर दे दो।

ठेकेदार ने   पुलिस को दी गयी शिकायती पत्र में कहा है कि ठेकेदार के खाते में  निर्माण निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा उनके खाते में जो अतिरिक्त धनराशि जमा करवाई गयी और धोखे से निकलवाई गयी वह सब पूर्व में ली हुई बिल बुक  प्रयोग कर फर्जी एवं कूट रचित बिल तथा फर्जी माप पुस्तिका बनाकर सहायक अभियंता के हस्ताक्षर के बिना निकाली गयी जिसमें बहुत बड़ा घोटाला किया गया है और ठेकेदार के बैंक खाते में लगभग चार करोड़ 50 लाख रुपये की धन राशि ऐसे निर्माण कार्य के लिए जमा करवाई गयी और निकलवाई गयी है जिसकी जानकारी ठेकेदार तक को नहीं।  इतना ही नहीं तत्कालीन परियोजना प्रबंधक आशुतोष कुमार दुबे द्वारा 22 मार्च 2018 को ठेकेदार को दिए हुए 28 लाख , 29 लाख,19 लाख 31 हज़ार 90 रूपये तथा 35 लाख 85हज़ार  959 रूपये ठेकेदार की बिना जानकारी के निकले गए। इतना ही नहीं इस तरह का घपला घोटाल निर्माण निगम के अधिकारियों ने और भी ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं से किया है। 

पुलिस को दी गयी शिकायत में ठेकेदार मोहम्मद आरिफ ने कहा है कि जब निर्माण निगम के अधिकारियों और परियोजना प्रबंधकों से उक्त अवैध तरीके से धनराशि को जमा करवाने और निकालने का कारण  पूछा गया तो अधिकारियों ने उल्टा ठेकेदार को ही धमकाना शुरू कर दिया कि आपके खाते में ही धनराशि डाली गयी और आपने ही निकाली है और तुम्हे जेल में डलवा देंगे।  इस तरह आतंकित और भयभीत होकर ठेकेदार ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड के यहाँ दरकार लगाई जिसपर 23 जून 2018 को तत्कालीन परियोजना प्रबंधक आशुतोष कुमार दुबे का स्थानांतरण क्र दिया गया वहीं इस शिकायत के बाद उनपर जानलेवा हमला तक करने का प्रयास किया गया। 

इतना ही नहीं अब निर्माण निगम द्वारा उनके द्वारा किये गए कार्यों का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है जो लगभग दो करोड़ 70 लाख रुपये का होना है।  इतना ही नहीं निर्माण निगण के परियोजना प्रबंधकों द्वारा माप पुस्तिका को न दिखाया जाना और १६ करोड़ रुपये का भुगतान अलग -अलग ठेकेदारों के नाम से अवैध तरीके से किया जाने का भी मामला सामने आया है और अब तो निर्माण निगम के अधिकारी गुंडागर्दी तक पर उतर आये हैं जिससे ठेकेदार को जान-माल के नुकसान का अंदेशा होने लगा है।  अपने शिकायती पत्र में ठेकेदार मोहम्मद आरिफ ने कहा है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। 





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