किच्छा (मो. यासीन) : किच्छा में हुए अभी तक के सभी चुनावों में भाजपा और कांग्रेस में ही सीधा मुकाबला होता आया है. लेकिन नगर पालिका अध्यक्ष पद में निर्दलीय प्रत्याशियों का जोर देखने को मिल रहा है. वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बार निर्दलीय प्रत्याशी दोनों मुख्य दलों को मजबूत टक्कर दे रहे हैं. किच्छा में नगर पालिका चुनाव को लेकिन निर्दलीय प्रत्याशियों के सामने सभी दल पानी भरते नजर आ रहे हैं. चाय की दुकान से लेकर ऊंचे प्रतिष्ठानों में निर्दलीय प्रत्याशियों की चर्चाएं हो रही हैं. हमेशा अप्रत्याशित परिणाम देने वाली किच्छा की जनता इस बार भी कुछ अलग परिणाम देने के मूड में नजर आ रही है.

निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरे बागी नेताओं ने अटकाई सबकी सांसें 

नगर पालिका पद के चुनाव के लिए जहां भाजपा, कांग्रेस और बसपा जैसे राष्ट्रीय दल मैदान में उतर चुके हैं, वहीं इन सबके बीच निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरे बागी नेताओं ने सबकी सांसें अटका दी हैं. किच्छा में युवा से लेकर बुजुर्ग वोटर भी राष्ट्रीय पार्टियों के बजाय निर्दलीय प्रत्याशियों पर भरोसा करने के मूड में नजर आ रहे हैं.

चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का जोर शोर

किच्छा में हुए अभी तक के सभी चुनावों में भाजपा और कांग्रेस में ही सीधा मुकाबला होता आया है, लेकिन नगर पालिका पद के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का जोर देखने को मिल रहा है. वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस बार निर्दलीय प्रत्याशी दोनों मुख्य दलों को मजबूत टक्कर दे रहे हैं.

़वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल अली तन्हा का कहना है कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता भी नाराज हैं. साथ ही जनता में भी इसका गलत संदेश गया है. किच्छा का वोटर निर्दलीय प्रत्याशियों के बारे में ज्यादा विचार कर रहा है.

मतदान की तिथि आने से पहले ही पार्टियों और समर्थकों की धड़कनें तेज हो गई हैं. मौजूदा हालात को देखा जाए तो निर्दलीय प्रत्याशियों से राष्ट्रीय दल विचलित हैं. हालांंकि वोटिंग का दिन आते-आते ऊंट किस करवट बैठता है, यह कह पाना मुश्किल है, लेकिन फिलहाल किच्छा में दोनों राष्ट्रीय दल चुनाव परिणाम को लेकर चिंतित हैं.





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