देहरादून : एक तरफ जहां बीजेपी मेयर की राज्यभर में 7 सीटों में से 5 सीटें पाकर खुशी मना रही है…तो वहीं सरकार के कई दिग्गज नेता अपने गढ़ की सीटें भी नहीं बचा पाये जिससे उनकी खूब किरकिरी हो रही है. मंत्रियों के गढ़ में और विधानसभा क्षेत्र में बुरी हालत देखने को मिली है. जिसमें मदन कौशिक के गढ़ से भी मेयर की कु्र्सी भाजपा के हाथ से निकली वहीं चुनावी रणभेदी में चुनाव लड़ने के साथ चुनाव जीतने के सुरमा माने जाने वाले कद्दावर नेता हरक सिंह रावत कोटद्वार मेयर की सीट जिताने में फिसड्डी साबित हुए.

उत्तराखंड भाजपा संगठन ने मंत्रियों के कद को देखते हुए उनकी ड्यूटी निकाय चुनाव में सात नगर निगमों में 7 मंत्रियों को मेयर सीट जिताने के उद्देश्य से उन्हे प्रभारी बनाया था. लेकिन भाजपा के 7 में से 5 मंत्री निकाय चुनाव की परीक्षा में पास हुए तो वहीं दो त्रिवेंद्र कैबिनेट में ऊंचा कद रखने वाले मदन कौशिक औऱ हरक सिंह रावत पूरी तरीके पार्टी की उम्मीदों प फेल साबित हुए.

कोटद्वार नगर निगम

कोटद्वार नगर निगम में मेयर पद कांग्रेस की हेमलता नेगी ने जीती। उन्होंने निर्दलीय विभा चौहान को एक हजार 568 वोटों से हाराया

हरक की पसंदीदी प्रत्याशी को नहीं दिया भाजपा ने टिकट

सूत्रों की मानें तो हरक सिंह रावत पूरे मनयोग से कोट्द्वार में मेयर प्रत्याशी को जिताने के लिए मेहनत नहीं की. क्यों कि उनकी पसंद के प्रत्याशी को पार्टी ने टिकट नहीं दिया था. सूत्रों की मानें तो रश्मि राणा और विभा चौहान में से किसी एक को हरक सिंह रावत प्रत्याशी बनाए जाने के पक्ष में थे लेकिन पार्टी ने लैंसडान से बीजेपी विधायक दिलीप सिंह रावत की पत्नी को टिकट दिया जो की तीसरे नंबर पर रहीं. इसे हरक की नापसंद की रुप में ही माना जा रहा है कि बीजेपी प्रत्याशी कोटद्वार में तीसरे नंबर पर रही है.

बीजेपी से भी ज्यादा वोट कोटद्वार मेयर पद के लिए वोट लेकर आई निर्दलीय विभा

विभा चौहान जिनके लिए हरक टिकट के लिए पैरवी कर रहे थे वो बीजेपी से भी ज्यादा वोट कोटद्वार मेयर पद के लिए वोट लेकर आई है. कहा तो ये भी जा रहा है कि बीजेपी प्रत्याशी को जिताने के लिए हरक सिंह रावत केवल मंचों पर ही प्रचार करते नजर आए ना तो खुले कोटद्वार की सड़कों पर उतरकर उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी के लिए वोट मांगे.

क्यों चिढ़ी थी कोटद्वार की जनता भाजपा औऱ हरक से???

कहा तो ये भी जा रही है कि कोट्द्वार की जनता हरक से नाराज हैं औऱ भाजपा से चिढ़ हुई है क्यों वहां विकास के नाम पर केवल दावे ही किए काम नहीं हुए…अगर बात करें कोट्द्वार में आई बाढ़ की तो हरक सिंह रावत वहां की जनता के हाल जानने तक नहीं गए जिसको भाजपा की हार का कारण माना जा सकता है.





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