उत्तराखंड परिवहन निगम ने अपनी बसों में डीजल की चोरी रोकने का अब नया तरीका निकाला है। रोडवेज ने अपनी बसों में जीपीएस सिस्टम और डीजल टैंक में सेंसर रॉड लगाने की तैयारी कर ली है। ट्रायल के तौर पर ग्रामीण डिपो की दो बसों में ये प्रयोग किया गया है। रोडवेज के अधिकारी फिलहाल ये प्रयोग मॉनिटर कर रहें हैं और अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही और बसों में ये व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

रोडवेज की बसों में डीजल चोरी की घटनाएं आम हैं। अक्सर डीजल चोरी की खबरें आती रहती हैं। रोडवेज के अधिकारियों के पास इसे रोकने का कोई खास उपाय भी नहीं था। एक हजार से अधिक बसों के बेड़े से रोजाना ही डीजल चोरी की खबरों ने अधिकारियों को परेशान कर दिया था। ये चोरी घाटे की वजह भी बन रही है लिहाजा अधिकारियों ने इसका सटीक तोड़ निकालने के बारे में सोचा। इसी के मद्देनजर अब डीजल टैंक में सेंसर रॉड लगाई जा रही है।

अधिकारियों की माने तो बसों का जो माइलेज आ रहा है वो साढ़े चार किमी के आसपास है जबकि ये छह किमी प्रति लीटर के आसपास होना चाहिए। अधिकारियों को उम्मीद है कि बसों में सेंसर रॉड लगने के बाद डीजल की चोरी रुकेगी और माइलेज में सुधार होगा।

डीजल चोरी रुकने से घाटे में कमी की उम्मीद भी है। रोडवेज को हर महीने तकरीबन 10 करोड़ रुपए का घाटा हो रहा है। रोडवेज हर महीने 45 करोड़ रुपए की आय कर रहा है जबकि प्रति महीने का खर्च 55 करोड़ के आसपास का है। इसमे से 19 करोड़ रुपए तो डीजल पर ही खर्च हो रहें हैं। उम्मीद है कि सेंसर रॉड लगने से न सिर्फ चोरी रुकेगी बल्कि घाटे में भी कमी आएगी।





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