30 नवंबर को पूर्ण कर्जमाफी और फसलों की लागत से डेढ़ गुना कीमत की मांग को लेकर किसान मार्च में शामिल होने किसान जुटने लगे हैं. अलग-अलग राज्यों के किसान दिल्ली के बिजवासन इलाके में पहुंच रहे हैं. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले किसान 29 नवंबर की सुबह बिजवासन से 26 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शाम पांच बजे तक रामलीला मैदान पहुंचेंगे और 30 नवंबर को सुबह संसद की ओर मार्च करेंगे.

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष और किसान नेता योगेंद्र यादव के नेतृत्व में किसान ये मार्च कर रहे हैं.किसान मुक्ति मार्च के नाम से यह यात्रा बिजवासन से शुरू हुई है और महिपालपुर, धौला कुआं, हिमाचल सदन, ताल कटोरा से कनाट प्लेस होते हुए शाम पांच बजे के करीब रामलीला मैदान पहुंचेंगे.

किसान मुक्ति मार्च के मद्देजनर जिन मार्गों से बचने की सलाह दी गई है, उनमें महिपालपुर, धौलाकुआं, 11 मूर्ति, ताल कटोरा, कनॉट प्लेस, रंजीत सिंह फ्लाइओवर व आसपास के मार्ग शामिल हैं.

राजधानी दिल्ली में गुरुवार को किसान मुक्ति मार्च और 30 नवंबर को संसद घेराव कार्यक्रम को देखते हुए पुलिस ने कमर कस ली है.दिल्ली में किसानों का गुरुवार को जहां महिपालपुर से रामलीला ग्राउंड पहुंचने का कार्यक्रम है, वहीं शुक्रवार को रामलीला ग्राउंड से संसद कूच करने का कार्यक्रम है.इसे देखते हुए जहां कानून व्यवस्था के मद्देनजर दस अतिरिक्त कंपनी पुलिस बल की व्यवस्था की गई है, वहीं ट्रैफिक के अतिरिक्त जवानों को भी महत्वपूर्ण मार्गों पर तैनात किया गया है.

किसान मुक्ति मार्च व किसानों के संसद घेराव में बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश हरियाणा समेत अलग-अलग राज्यों से किसान पहुंच रहे है.29 नवंबर को किसान मुक्ति मार्च के बाद रामलीला मैदान में ही रात को रुकेंगे.वहीं, किसानों के लिए सांस्कृतिक संख्या का आयोजन किया जाएगा.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्यवय समिति व किसान मुक्ति मार्च से जुड़े अभिक साहा के मुताबिक किसान आंदोलन में देशभर के अलग-अलग राज्यों के 201 किसान संगठन पहली बार पहली बार एकता कायम की है.ऐसा पहली बार है कि देश के किसान संगठन इतनी बड़ी संख्या में एकजुट हुए हैं.





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