• संघ प्रचारकों में सेवा कार्य के बजाय पावर पाने की होड़ 
  • संघ के बेदाग चेहरे पर चरित्रहीन कथित स्वयं सेवक लगा रहे दाग 
  • चाल चरित्र और चेहरे का मूलमंत्र बना मात्र जुमला 
  • 11 नवंबर को पुराने स्वयं सेवकों की आपातकालीन बैठक 

राजेन्द्र जोशी 

देहरादून : #Me Too की आंच में झुलस रहे भाजपा संगठन के पदाधिकारियों की लम्बी होती फेहरिस्त से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पुराने स्वयं सेवक शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं।  उन्हें अब वर्षों पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं भारतीय जनसंघ की प्रथम टोली के नेता स्वर्गीय श्री  सुन्दर सिंह भंडारी जी का वह सम्बोधन याद आ रहा है जो उन्होंने  संघ के एक प्रशिक्षण वर्ग में विचार व्यक्त करते हुए कहे थे कि,कार्य सिद्धि के लिए आचरण और व्यवहार की शुद्धि आवश्यक है,समाज हमें करोड़ों आंखों से देखता है तथा योग्य व्यवहार की अपेक्षा करता है। 

स्वर्गीय श्री सुन्दर सिंह भंडारी जी का यह वक्तव्य भले ही उस समय के स्वयं सेवकों के लिए केवल एक भाषण मात्र था , क्योकि तत्कालीन समय में स्वयं सेवकों और उनके प्रमुखों को देश का समाज भगवान् तो नहीं लेकिन भगवान् जैसा मानता था। उनके आचार -व्यवहार और चरित्र से लोग सीख लेते थी और उनके अनुसार त्याग ,तपस्या और बलिदान के सिद्धांत में अपने को ढ़ालने का प्रयास करते थे। इस दौरान कई ऐसे मूर्धन्य स्वयं सेवक भी हुए हैं जिन्होंने देश की सेवा के लिए अपने परिवारों के साथ -साथ एशोआराम की वह सब चीजों का परित्याग तक किया था ,जिसको पाने के लिए वर्तमान के कुछ कथित स्वयं सेवक अपनी ही नहीं संघ की प्रतिष्ठा तक को ताक पर रखते हुए संघ को देश -दुनिया की नज़रों में गिराने का काम कर रहे हैं। 

डॉ. आबाजी थत्ते जो कोलकाता क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज के पहले ऐसे डॉक्टर की उपाधि पाने वाले स्वयं सेवक हुए थे जिन्होंने देश और समाज के लिए डॉक्टरी छोड़ संघ के संस्थापक परम पूज्य गुरु जी के सानिध्य में आकर जीवन परियन्त संघ का कार्य किया। वे चाहते तो तत्कालीन समय में देश में कहीं भी सरकारी नौकरी या निजी प्रेक्टिस कर रुपये कमा सकते थे लेकिन उन्होंने चांदी के चंद रुपयों की जगह समाज को अपना जीवन दे दिया। उन्होंने कहा था निहित स्वार्थ की खातिर रातदिन संघ को कोसने वाले क्या समझेंगे संघ स्वयंसेवकों की इस जीवटता को, संघ प्रचारकों की इस परंपरा को ?” ऐसे  स्व.माधव सदाशिवराव गोलवलकर, स्व.मधुकर दत्तात्रय देवरस, स्व. प्रोफ़ेसर राजेंद्र सिंह, स्व.कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन और वर्तमान संघ प्रमुख डॉ. मोहनराव मधुकरराव भागवत जैसे महान लोग भी हुए हैं जिन्होंने देश के समाज को अपना जीवन दे रखा है। उत्तराखंड से भी कई स्वयंसेवक इस सूची मे शामिल हैं जिनमें स्व. नित्यानंद सहित ,स्व.देवेंद्र दत्त शास्त्री, स्व.गजेंद्र दत्त नैथानी, श्री निवास जी और दान सिंह बिष्ट आदि जैसे प्रमुख लोग भी हुए हैं जिन्होंने अपना जीवन संघ को समर्पित किया। 

उत्तराखंड में वर्तमान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कथित स्वयं सेवकों की कार्यप्रणाली और उनके आचार व्यवहार से तो कहीं से भी यह प्रतीत नहीं होता कि ये लोग संघ कार्य के लिए यहाँ आये हुए हैं। भाजपा से अभी एक महिला के दुर्व्यवहार और घृणित वार्तालाप के कारण हटाए गए  संगठन महामंत्री संजय कुमार सहित कई ऐसे लोग इसका उदाहरण हैं। जो संघ के राष्ट्रीय एजेंडे को प्रदेश में स्थापित करने के बजाय अपने निजी एजेंडे पर संघ के प्रभाव का  दुरपयोग करते हुए संघ को बदनामी की गुफा में धकेलने का कार्य कर रहे हैं।  इनके इस व्यवहार से संघ ही नहीं भाजपा भी अपवित्र हो रही है। और इसका प्रभाव संघ को जीवन देने आ रहे नए स्वयं सेवकों पर भी पड़ रहा है।  इतना ही नहीं प्रदेश में संघ के सिस्टम में जहाँ क्षेत्रवाद , जातिवाद और न जाने कौन-कौन से वाद पैदा हो गए है जिससे संघ की साख राज्य में गिरती जा रही है।  

संघ के दिए संस्कारों के  होते अवमूल्यन से सूबे के पुराने और समर्पित स्वयं सेवक हैरान और परेशान हैं। यही कारण है कि इस ज्वलंत विषय पर रविवार 11 नवंबर को ऐसे स्वयं सेवकों के एक आपातकालीन बैठक बुलाकर उत्तराखंड में संघ की वर्तमान स्थिति पर विचार विमर्श करने का मन बनाया है। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक बुजुर्ग स्वयंसेवक का कहना है कि उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का स्तर दिन ब दिन गिरता जा रहा है लिहाज़ा संघ स्तर पर इसपर विचार करना जरूरी हो गया है क्योंकि हमने अपना सारा जीवन संघ को समर्पित किया है और यहाँ संघ की यह स्थिति हम नहीं देख सकते। 





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