• निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून । राज्य में हो रहे नगर निकाय चुनाव में भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धियों के साथ मैदान में है। वहीं कांग्रेस भाजपा की नाकामियों को जनता के सामने रखने जा रही है। भाजपा के लिए चुनावों में यह कांग्रेस के मुकाबले बढ़त है। लेकिन 2019 के चुनावों से पहले ये चुनौती भी है। चुनौती है दोहरी एंटी इनकम्बेंसी से बचने की।
स्थानीय मुद्दों पर लड़े जा रहे निकाय चुनाव में कांग्रेस सरकार की नाकामियों को जनता के सामने ले जा रही है। स्थानीय मुद्दों के साथ साथ सरकार की विफलता को सामने रखा जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि केंद्र सरकार के कई फैसले- जैसे नोटबंदी और जीएसटी जैसे विषयों को कांग्रेस केंद्र सरकार की विफलता बताते हुए इन्हें निकाय चुनावों में मुद्दा बना रही है। ऐसे में उनके सामने एंटी इनकम्बेंसी की दोहरी मार पड़ने वाली है। लेकिन भाजपा मानती है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कामों के आधार पर जनता उन्हें वोट करेगी। बीजेपी इस बात से आश्वस्त है कि उनके कामों पर जनता वोटों की मोहर लगा उन्हें जीत दिलवाएगी।
सूबे में चल रहे निकाय चुनावों में भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। लेकिन राज्य सरकार के लिए इस चुनाव के नतीजे सरकार के किए गए कामों का रिपोर्ट कार्ड साबित होने वाले हैं। बीजेपी राज्य सरकार के लगभग दो साल के कामों का लेखा जोखा लेकर जनता के सामने जा रही है। वहीं सरकार की एंटी इन्कम्बेंसी ही सरकार के लिए चुनौती भी होगी। इस मामले में राजनीतिक विषलेश्कों का मानना है कि सरकार के कामों पर जनता के रुझानों का असर इन चुनावों के नतीजों पर पड़ेगा। 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले जनता अपना मूड लगभग बना चुकी है। निकाय चुनावों में उनके इस मूड का असर साफ तौर पर दिखेगा।





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