गुरुवार को भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) ने पृथ्वी की निगरानी करने वाले देश के हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग उपग्रह (हायसिस) को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया.

पीएसएलवी-सीए (कोर अलोन) संस्करण ने एक भारतीय व आठ देशों के 30 छोटे उपग्रहों के साथ श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी थी. रॉकेट मिशन का उल्लेखनीय पहलू उपग्रहों को दो अलग-अलग कक्षाओं में स्थापित करना है जिसमें से एक उपग्रह ऊपरी कक्षा और अन्य निचली कक्षा में स्थापित किए जाने थे.

भारतीय उपग्रह हायसिस अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो चुका है और बाकी अन्य भी जल्द ही एक निचली कक्षा में स्थापित कर दिए जाएंगे. हायसिस का प्राथमिक लक्ष्य विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के इंफ्रारेड और शॉर्ट वेव इंफ्रारेड फील्ड में पृथ्वी की सतह का अध्ययन करना है. इसके साथ ही इसके रणनीतिक उद्देश्य भी हैं.

44.4 मीटर लंबे और 230 टन वजनी पीएसएलवी-सीए (कोर अलोन) संस्करण ने सुबह 9.58 बजे प्रक्षेपण स्थल से उड़ान भरी. उड़ान के बाद 16 मिनट में रॉकेट के चौथे चरण को बंद कर दिया गया और इसके एक मिनट बाद ही भारतीय उपग्रह हायसिस निर्धारित कक्षा 636 किमी घ्रुवीय सूर्य समन्वय कक्ष (एसएसओ) में स्थापित हो गया.

रॉकेट को 30 अन्य विदेशी उपग्रहों को स्थापित करने के लिए 503 किलोमीटर की निचली कक्षा में लाया जाएगा. हायसिस के उत्क्षेपण के बाद, उड़ान के 59.65 मिनट बाद रॉकेट के चौथे चरण को फिर से शुरू किया जाएगा. पीएलएलवी रॉकेट अपने साथ 380 किलोग्राम वजनी हायसिस और कुल 261 किलोग्राम के 30 अन्य छोटे उपग्रह ले गया है. विदेशी उपग्रहों में से 23 अमेरिकी उपग्रह हैं और शेष ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, फिनलैंड, मलेशिया, नीदरलैंड और स्पेन के हैं.





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