• कॉलेज के असली मालिक मनीष वर्मा ने दायर की थी याचिका 
  • छात्रों ने भी दायर की थी सुभारती के खिलाफ याचिका

 

नई दिल्ली : सुभारती मेडिकल कॉलेज के संचालक अतुल कृष्ण भटनागर ,यशवर्धन रस्तोगी पर सुप्रीम कोर्ट बहुत नाराज हुआ और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर MBBS में एडमिशन का आर्डर लेना सुभारती के इन संचालको को बहुत भारी पड़ गया ।

आपको बता दे कि सुभारती मेडिकल कॉलेज के संचालक अतुल कृष्ण भटनागर व यशवर्धन रस्तोगी ने कॉलेज सम्पति के असली स्वामी श्री मनीष वर्मा के साथ धोखाधड़ी कर सम्पति हड़पने की साज़िश की थी सुभारती ने जो बैंको को असली स्वामियों की देनदारी थी वो अदा नही की और सुभारती द्वारा श्री मनीष वर्मा को दिए करोड़ो रूपये के चैक बाउंस हो गए थे तथा सुभारती के अतुल भटनागर द्धारा तत्कालीन डीजीपी सिद्धू से मिलकर श्री मनीष वर्मा को झूठे मुकदमे में फसाया जो मनीष वर्मा बाद में जीत गए थे ।

श्री मनीष वर्मा ने सुभारती के संचालको अतुल भटनागर व यशवर्धन रस्तोगी पर कई मुकदमे किये हुए है जिनमे हर एक मे फैसला श्री मनीष वर्मा के हक में आया है क्योंकि श्री मनीष वर्मा ने सुभारती को एक बीघा जमीन के रजिस्ट्री नही की थी क्योंकि एग्रीमेंट पर ही सुभारती सारी शर्तो में फेल हो गया था जिसके चलते MCI ने आज तक इस कॉलेज को MBBS की अनुमति नही दी हद तो तब हो गयी जब सुभारती के इन संचालको अतुल कृष्ण भटनागर व यशवर्धन रस्तोगी ने सुप्रीम कोर्ट में फर्जी दस्तावेज व झूठे तथ्य बताकर MBBS एडमिशन की अनुमति ले ली जिसे असली मालिक श्री मनीष वर्मा ने चुनौती दी तथा सच्चाई जानने पर MBBS के छात्रो ने भी सुप्रीम कोर्ट में शिफ़्टिंग की याचिका दायर की क्योंकि एक साल छात्रों पढ़ाने के बावजूद सुभारती छात्रो की परीक्षा नही करवा पाया था।  क्योंकि सुभारती कर पास एचएनबी यूनिवर्सिटी की मान्यता नही थी और छात्रो के साथ भी सुभारती ने धोखाधड़ी करके मोटी फीस हड़प ली थी और अपनी फर्जी रास बिहारी सुभारती यूनिवर्सिटी से परीक्षा की बात कह रहा था पर जिस दिन राज्य की तत्कालीन हरीश रावत कैबिनेट ने रास बिहारी विश्विद्यालय का प्रस्ताव पारित किया उस दिन कोर्ट से संपत्ति पर स्टे लगा हुआ था और जिस दिन विधान सभा मे पारित हुआ उस दिन भी कोर्ट का स्टे लगा हुआ था जिसे श्री मनीष वर्मा ने माननीय उच्व न्यायालय नैनीताल में चुनौती दी हुई है और लंबित है तथा UGC ने रास बिहारी सुभारती यूनिवर्सिटी के बारे में आरटीआई में जवाब दिया कि इसका अभी निरीक्षण नही हुआ है और ये बिना सम्बन्धित कोर्स की कॉउंसिल की अनुमति के बिना कोई कोर्स संचालित नही कर सकता है । तथा इसके बिना राज्य सरकार भी संचालन की अनुमति नही दे सकती है । इसिलए रास बिहारी सुभारती यूनिवर्सिटी अवैध है ।

सुप्रीम कोर्ट में चली लंबी बहस में राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल आये और उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न विवादों के चलते इसको टेकओवर करना चाहती है और स्वयं चलाएगी जिस पर माननीय न्यायाधीश ने कॉलेज को तत्काल आज ही सील करने व टेकओवर करने के आदेश दे दिए । समाचार लिखे जाने तक यही आदेश आया था कि DGP उत्तराखंड तुरंत मौके पर पुलिस भेज कर आज ही कॉलेज सील करे तथा 4 हफ्ते में राज्य सरकार टेकओवर करे ।





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