देवभूमि मीडिया ब्यूरो

उत्तराखंड सरकार भले ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टाॅलरेंस का दावा करती हो पर सत्ता पक्ष के विधायक सरकार के दावों पर खुलकर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जीरो टाॅलरेंस पर जिस मामले से आने वाले दिनों में सरकार की मुसीबतें बढ सकती हैं वह है जुड़ा है। सीमांत जनपद चंपावत में सीमा सुरक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी सड़क से। इस सड़क निर्माण में करोड़ों रुपये के घोटाला कर मामले सामने आने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कार्रवाई के निर्देश दिए पर अभी तक हुआ कुछ नहीं। पूरे मामले पर पेश है एक रिपोर्ट।

चंपावत जिले में इन दिनों सीमा सुरक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण टनकपुर-जौलजीबी सड़क मार्ग का निर्माण हो रहा है। इसके 45 किमी लंबे भाग के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग ने वर्ष 2016 में टेंडर आमंत्रित किए थे। इस सड़क का निर्माण 123 करोड़ रुपये की लागत से होना था। टेंडर के लिए तीन ठेकेदारों ने आवेदन किए थे। इस मामले को विधानसभा में उठाने वाले लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का आरोप है कि तत्कालीन सरकार ने दो अन्य ठेकेदारों को अनदेखा किया था। सरकार ने कांग्रेसी नेता के भाई दलीप सिंह अधिकारी का टेंडर स्वीकृत किया था। इस निविदा में लगे कई प्रमाण पत्रों को गलत पाया गया था। अब मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी विभाग लीपापोती कर रहा है, जबकि ठेकेदार जांच में दोषी पाया गया है। इसलिए ठेकेदार को काली सूची में डाला गया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को मामले मेें लिप्त सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। दो चीफ इंजीनियरों की जांच के बाद पूरा मामला साफ हो गया है कि यह पूरा मामला गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी का है। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने इस पूरे मामले में बड़ा खुलासा करते हुए अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री ओमप्रकाश और लोक निर्माण विभाग के आला अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कार्रवाही न होने पर आंदोलन की बात कही।  

टनकपुर-जौलजीबी सड़क की निविदा प्रक्रिया में खामी पाई गई थी। सड़क में 123 करोड़ का ठेका पाने के लिए गलत प्रमाण पत्र लगाए थे। जिसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मुख्य सचिव को दिए कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश थे। शासन के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग के कुमाऊं चीफ बीएन तिवारी, गढ़वाल चीफ ललित मोहन ने गलत तरीके से ठेका आवंटन की जांच की थी। जांच में ठेका आवंटन में नियमों को ताख पर रखने की पुष्टि हुई थी। इसलिए दोनों चीफ इंजीनियरों ने गलत अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाले विभागीय अभियंताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति की थी। सत्ता पक्ष द्वारा पूरे मामले को पुरजोर तरीके से उठाये जाने और कार्यवाही न होने पर आंदोलन की बात कहने से संसदीय कार्य व वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि मामला गंभीर है मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के संज्ञान में पूरा मामला है जांच में दोषी पाये जानों पर कड़ी कार्यवाही होगी।

एनएच 74 घोटाले के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है जिसमें 123 करोड़ के ठेका आवंटन में नियमों को ताक पर रख दिया गया। भाजपा विधायक के बड़े खुलासे के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है। देखना होगा भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्व का ऐलान करने वाले मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के निर्देश पर एनएच 74 की तरह इस मामले में क्या बड़ी कार्यवाही होती है।    





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