• सदन में गूंजा गौवंश संरक्षण का मुद्दा
  • पशुपालन मंत्री रेखा आर्य नहीं पायी सवाल का जवाब 
  •  विधानसभा स्पीकर अग्रवाल ने इस प्रश्न को किया स्थगित
  • गैरसैंण को लेकर विपक्ष ने सदन में किया हंगामा 
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून । उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन विपक्ष ने गैरसैंण राजधानी को लेकर सदन में हंगामा किया। विपक्ष का कहना था कि सरकार गैरसैंण राजधानी के मसले पर अपना रूख स्पष्ठ करें। सत्ताधारी दल के नेता राजधानी के मसले पर विरोधाभासी दबयानबाजी कर रहे हैं जिससे कि जनता में रोष है। विपक्ष का कहना था कि गैरसैंण के मसले को लटकाकर न रखा जाए। 
पूर्वाह्न 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरु होते ही विपक्ष ने गैरसैंण राजधानी का मसला उठा दिया। विपक्षी सदस्य अपने स्थानों पर खड़े होकर सरकार से गैरसैंण पर स्थिति स्पष्ठ करने की मांग करने लगे। उनका कहना था कि प्रदेश को बने 18 वर्ष हो गए हैं लेकिन अभी तक राजधानी का मसला हल नहीं हो पाया है। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा ह्रदयेश, चकराता विधायक प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, करन माहरा, राजकुमार, निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार का कहना था कि सत्ताधारी दल के नेता गैरसैंण राजधानी के मसले पर अलग-अलग बयान दे रहे हैं, जिस कारण लोगों में रोष पैदा हो रहा है।
विपक्ष का कहना था गैरसैंण मुद्दे पर नियम-310 के तहत चर्चा कराई जाए। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा गैरसैंण के मसले पर नियम-58 के तहत चर्चा कराए जाने की व्यवस्था दिए जाने के बाद विपक्ष शांत हुआ। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हरदयेश का कहना था कि सत्ताधारी दल के नेताओं के बयान आ रहे कि गैरसैंण को ग्रीमष्मकालीन राजधानी बनाया जाएगा, यदि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया जाता है तो फिर स्थायी राजधानी कहां बनेगी। निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार का कहना था कि गैरसैंण राजधानी का मसला जनता की भावनाओं से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित करें।  
वहीं विधानसभा सत्र में शुक्रवार को गौवंश संरक्षण का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। सदस्यों का कहना था कि राज्य विधानसभा से गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिए का संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया है, लेकिन राज्य में गौवंश के संरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। गौवंश सड़क पर अवारा घूम रहा है। 
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में पशुपालन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार रेखा आर्य ने बताया कि उत्तराखंड में गौवंश संरक्षण अधिनियम-2007 के प्राविधानों के अनुरूप गैर सरकारी पशु कल्याण संस्थाओं के माध्यम से निराश्रित गौवंश को शरण देने के लिए प्रतिबद्ध संस्थाओं को राजकीय मान्यता और अनुदान दिए जाने का प्राविधान किया गया है। गत वित्तीय वर्षों में राज्य अंतर्गत मान्यता एवं अनुदान के लिए अर्ह संस्थाओं को राजकीय अनुदान दिया गया है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 200 लाख के बजट का प्राविधान किया गया है। राज्य में 24 गोसदनों को भरण-पोषण मद में 127.96 लाख और 10 गोसदनों को गोशाला निर्माण मद में 72.04 लाख का अनुदान दिया जाना प्रस्तावित है। विधायक राजकुमार ठुकराल, मुन्ना सिंह चैहान ने भी सड़क पर अवारा घूम रहे गौवंश को रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की मांग की। विधायक मुन्ना सिंह चैहान का कहना था कि गौवंश को कौन लोग सड़क पर अवारा हालत में छोड़ रहे हैं उनको भी चिन्हित किया जाना चाहिए। प्रश्न का संतोषजनक जवाब न मिलने पर विधानसभा स्पीकर ने इस प्रश्न को स्थगित कर दिया।  




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