• स्वाइन फ्लू के आतंक में राज्यवासी जीने को मजबूर 
  • नामीगिरामी अस्पताल में मरा पहला स्वाइन फ्लू रोगी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड में पिछले 20 दिनों में स्वाइन फ्लू से पीड़ित 11 लोगों की मौत के बाद प्रदेश  स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी  कह रहे हैं कि प्रदेश के अस्पतालों में H1N1 वायरस से पीड़ित रोगियों के उपचार के लिए दवाइयों सहित सभी कारगर व्यवस्थायें मौजूद हैं।लेकिन लोग इनके दावों के बाद भी क्यों मरे इसका वे जवाब नहीं दे पाए। जबकि देहरादून के नामी गिरामी पांच सितारा अस्पताल में स्वाइन फ्लू जैसी बीमारी से पहली मौत होने ने अस्थायी राजधानी में कुकुरमुत्तों की तरह खुल रहे अस्पतालों की पोल खोलकर रख दी है कि वे रोगियों को बचाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं या उनकी जेबें काटने में ज्यादा विश्वास रखते हैं। 

प्रदेश के स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. ताराचंद्र पंत ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि इस महीने की शुरूआत से लेकर अब तक राज्य में स्वाइन फलू के 25 मामले सामने आये हैं जिसमें से 11 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस रोग के 11 मरीज अभी भी विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं जिनका उपचार किया जा रहा है जबकि तीन अन्य मरीजों को उपचार के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी जा चुकी है।

H1N1 वायरस के कारण प्रदेश में आखिरी मौत कल एक बच्चे की हुई है जो उत्तरकाशी जिले के डुंडा जिले का रहने वाला था। बीते 21 जनवरी को महंत इन्द्रेश अस्पताल में भर्ती कराये गए एक वर्षीय अनुराग ने कल दम तोड़ दिया था। प्रदेश में स्वाइन फ्लू से पीड़ित रोगी की मृत्यु का पहला मामला तीन जनवरी को सामने आया था जब मैक्स अस्पताल में भर्ती 61 वर्षीय प्रेम मोहन काला की मौत हो गई। प्रेम मोहन काला को अस्पताल में 26 दिसंबर को भर्ती कराया गया था।

हालांकि, डॉ. पंत ने दावा किया कि इस बीमारी से निपटने के लिए प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से तैयार है और दवाइयों के पर्याप्त भंडार के साथ ही प्रत्येक जिला एवं बेस चिकित्सालय में H1N1 आइसोलेशन वार्ड स्थापित कर दिए गए हैं जिनमें 176 बिस्तर उपलब्ध हैं। बीमारी से हो रही मौतों के बारे में डॉ. पंत ने कहा कि स्वाइन फ्लू से दम तोड़ने वाले ज्यादातर मरीजों को इस बीमारी के अलावा अन्य कई बीमारियां भी थीं जिसके कारण वे इस रोग का मुकाबला नहीं कर पाये। उन्होंने कहा कि स्वाइन फ्लू एक ‘सीजनल इन्फ्लुएन्जा’ की तरह ही है जो साधारण सर्दी-जुकाम की तरह होता है और स्वत: ठीक हो जाता है लेकिन मधुमेह रोग से पीड़ित होने तथा कम उम्र के बच्चे और अधिक उम्र के लोगों पर इसका असर जानलेवा हो सकता है।

डॉ. पंत ने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम का सबसे कारगर उपाय यही है कि इसके लक्षण होने पर शीघ्र की चिकित्सकीय परामर्श लें और लोगों से मिलने-जुलने से परहेज करें।





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