देवभूमि मीडिया ब्यूरो

देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि पिछले 22 माह में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश हित में अनेक नीतिगत निर्णय लिये गये हैं। राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों तक जनकल्याणकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की गई है। प्रदेश के अर्थिक विकास एवं पिछड़ेपन को दूर करने तथा उद्योHगों को बढावा देकर निवेश की व्यापक संभावनाएं तलाशी है।

  • निवेश से बदलेगी तस्वीर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन कर रू0 01 लाख 24 हजार करोड़ क एमओयूे साइन किए गये। इसमें से रू0 40 हजार करोड़ के निवेश पहाड़ी क्षेत्रों के लिए किए गए हैं। पहाड़ों पर लघु उद्योगों का विकास किया जा रहा है। बागेश्वर में पहली लीसा फैक्ट्री की शुरुआत हुई है। इसमें से लगभग रू0 10 हजार 300 सौ करोड़ के प्रोजेक्ट जल्द धरातल पर उतरने लगेंगे। इससे 20 हजार रोजगार सृजित होंगे। मार्च तक यह लगभग 13 हजार करोड होने का अनुमान है। आने वाले 3 चार महीनों में 30 हजार करोड़ रुपए के अन्य प्रोजेक्ट भी धरातल पर दिखाई देने लगेंगे।

उन्होंने कहा कि हमारी कैबिनेट ने समय-समय पर राज्य के विकास के लिए नई नीतियों को मंजूर किया हैः। राज्य सरकार द्वारा 15 क्षेत्रों के लिये मौजूदा नीतियों में संशोधन करते हुये नये क्षेत्रों के लिये भी नीतियां बनायी गयी है, जिनमें मैगा औद्योगिक और निवेश नीति, स्टार्टअप नीति, एम.एस.एम.ई., फिल्म नीति, सूचना संचार प्रौद्योगिक और इलेक्ट्राॅनिक्स नीति, पर्यटन नीति, मेगा फूड पार्क प्रोत्साहन, आयुष नीति, मैगा टैक्साटाईल पार्क पाॅलिसी, सौर ऊर्जा नीति, इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण नीति, एरोमा पार्क नीति, बृहद औद्योगिक पंूजी निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, जैव प्रौद्योगिकी नीति, चीड़ की पत्तियों व अन्य बायोमास से ऊर्जा उत्पादन, कीडा जड़ी दोहन और विपणन नीति सम्मिलित है। एमएसएमई के तहत उद्योगों की स्थापना के लिये जिलाधिकारियों को अधिकार दिये गये है। इसके भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है।

  • विकास दर और प्रति व्यक्ति आय बढ़ी

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रदेश की विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में बढोतरी हुई है। वर्ष 2018-19 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2,14,993 करोड़ अनुमानित है। राज्य में अनुमानित आर्थिक विकास दर 2017-18 में 6.82 फीसद थी जो 2018-19 में बढ़कर 7.03 प्रतिशत हो गई है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत दर 7.2 प्रतिशत है। वर्ष 2018-19 में उत्तराखंड में प्रति व्यक्ति आय यानि एक आदमी की सालाना कमाई 1,90.284 रुपये है जबकि देश की प्रति व्यक्ति आय 1,25,397 है। हालांकि विकास दर और प्रति व्यक्ति आय में मैदानी जिलों और पहाड़ी जिलों में बहुत फर्क है। हमारी कोशिश इसी फर्क को पाटने की है। हम पहाड़ों को ध्यान मे रखकर योजनाएं बना रहे हैं।

  • अटल आयुष्मान योजना बनी लोगों का कवच

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना लोगों का रक्षा कवच बनी है। प्रदेश के सभी 23 लाख परिवारों को निशुल्क स्वास्थ्य सुरक्षा सालाना 5 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जा रही है।

इस योजना में अब तक 11 लाख से ज्यादा गोल्डन कार्ड बनाये जा चुके है। करीब 3 हजार लोगों का निशुल्क इलाज किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 तक जहां राज्य में 17 साल में केवल 1123 डॉक्टर तैनात थे, वहीं हमने 17 महीनों में 1137 नए डॉक्टरों की भर्तियां की है। 26 जनवरी से निशुल्क एयर एंबुलेंस सेवा शुरू कर रहे हैं। दुर्गम क्षेत्रों के लिए यह वरदान साबित होगी। अल्मोड़ा में डायलिसिस सेवा शुरू की गई है, पिथौरागढ़, श्रीनगर, कोटद्वार में जल्द शुरू करने वाले हैं। पहली बार राज्य में टेलीमेडिसिन और टेलीरेडियोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकें लाई गई हैं। आशा कार्यकत्रियों के बकाया भुगतान के लिए रू0 33 करोड़ जारी किए हैं। एएनएम और आशाओं के लिए दुर्घटना बीमा योजना शुरू की है।

  • अवस्थापना सुविधाओं का किया गया विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि चार धाम ऑलवेदर रोड़ का काम प्रगति पर है। साथ ही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, टनकपुर रेल लाइन व रुड़क देवबंद रेल लाइन पर जल्द काम शुरू होने वाला है राज्य के विकास में यह मील का पत्थर साबित होगा। राज्य के कोने कोने को सड़क व पुलों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। हम जो भी काम कराते हैं टाइम बाउंड करवा रहे हैं। देहरादून में अटल सेतु और विश्वेसरैया टनल इस बात का उदाहरण हैं। पिछले दो साल में रिकॉर्ड 4270 कि.मी. सड़कों का निर्माण, जबकि 1472 कि.मी. सड़कों का पुर्ननिर्माण हुआ 2022 तक 355 पुलों का निर्माण का लक्ष्य है, 155 पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है। टिहरी का बहुप्रतीक्षित डोबरा चांठी पुल का निर्माण अगस्त 2019 तक पूर्ण हो जाएगा। इसके लिये 87 करोड की धनराशि स्वीकृत की गई है। अजबपुर फ्लाईओवर भी फरवरी 2019 तक पूर्ण हो जाएगा

  • आजादी के 71 साल बाद सीमांत गांवों में पहुंची बिजली

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 71 साल बाद सीमांत गांवों में बिजली पहुचायी गयी है। सौभाग्य योजना के अधीन 246 गांवों को बिजली पहुंचाई गई, जबकि दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना से 94 गांव बिजली से रोशन हुए हैं। प्रदेश के लोगों को सस्ती हवाई सेवाओं का तोहफा मिला है। अब देहरादून से पिथौरागढ़ और पंतनगर मात्र एक घंटे की दूरी पर रह गए हैं। देहरादून से 23 शहरों तक सीधी उड़ान सेवाएं शुरू की गई है। कनेक्टिविटी के साथ ही रोपवे निर्माण में हमने काफी प्रगति की है। सुरकंडा देवी तक रोपवे निर्माण लगभग पूर्ण हो गया। पूर्णागिरी मंदिर तक भी रोपवे निर्माण चल रहा है। इसके अलावा मसूरी, केदारनाथ को भी रोपवे से जोड़ा जा रहा है। 42 वर्षों से लम्बित लखवाड़ बहुद्देशीय परियोजना के लिये एमओयू पर विभिन्न राज्यों द्वारा हस्ताक्षर किये जा चुके है। इससे 300 मेगावाट विद्युत प्रदेश को मिलेगी। रेणुका बांध पर भी एमओयू किया जा चुका है। किसाऊ परियोजना पर भी लगभग सहमति हो चुकी है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सौंग बांध का निर्माण आरम्भ हो जायेगा। सूर्यधार झील का कार्य प्रगति पर है। इस योजनाओं को भी कम लागत में बनाया जा रहा है।

  • किसानों की आमदनी दोगुनी करने के किये गये प्रयास

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में दिसम्बर 2018 तक 1,60,479 कृषकों को 80975.00 लाख के ऋण उपलब्ध कराये गये हंै। फार्म मशीनरी बैंक से कृषि उपकरणों की खरीद पर 80 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। गन्ना किसानों के बकाया का 100 प्रतिशत भुगतान किया गया है उत्तराखंड को ऑर्गैनिक स्टेट बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं प्रदेश में 10 हजार जैविक क्लस्टर बनाने पर काम जारी है ’जिसमें से 1.5 लाख हेक्टेयर पर जैविक खेती की जा रही है। खेती के साथ साथ पशुपालन, मत्स्यपालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। दुग्ध संघों को 4 रुपए प्रति लीटर की प्रोत्साहन राशि गांवों में बागवानी, सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सगंध खेती से गांवों की तस्वीर बदल रही है। प्रदेश के किसानों को अब 01 लाख तक का तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को 05 लाख तक का ऋण बिना ब्याज के दिया जायेगा। भुगतान में धान का पूरा मूल्य किसानों को रिकार्ड समय से आनलाईन भुगतान किया गया।

  • पर्यटन प्रदेश बनेगा उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन को बढावा देने के लिये नई पर्यटन नीति लागू की गई है जिसके तहत पर्यटन की गतिविधियों खासतौर से एडवेंचर टूरिज्म को एमएसएमई के दायरे में लाया गया है। ग्रामीण पर्यटन को मजबूत करने के लिए 5 हजार होमस्टे स्थापित करने का लक्ष्य है जिसमें से 802 नए होमस्टे पंजीकृत हो चुके हैं। इसमें होमस्टे को घरेलू दरों पर बिजली देने का मन बनाया है। 13 जिलों में 13 नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन का विकास जारी है, इसके लिए बजट जारी किया गया है। ऋषिकेश में वेलनेस सिटी व कनवेंशन सेंटर स्थापित किया जा रहा है। ऋषिकेश, ऑली, टिहरी में एडवेंचर गतिविधियों को प्रोत्साहन। ऋषिकेश एडवेंचर टूरिज्म की राजधानी बना। फिल्म पॉलिसी से राज्य में फिल्मों की शूंटिंग को प्रोत्साहन मिला है। 100 फिल्मों, टीवी सीरियल की शूटिंग उत्तराखंड में हो चुकी है। बड़े बड़े निर्देशक और अभिनेता यहां शूटिंग के लिए आने वाले हैं। होम स्टे योजना के तहत विद्युत बिलों का भुगतान व्यवासायिक दर की बजाय घरेलू दर पर उपलब्ध करायी जायेगी। शीघ्र ही ऋषिकेश में इन्टरनेशन कन्वेकशन सेन्टर की स्थापना की जायेगी। इसके लिये भारत सरकार द्वारा 934 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क उपलब्ध करायी गयी है। इसका बाजार मूल्य 20 हजार करोड है। प्रदेश में फिल्म सिटी के निर्माण के लिये एयर पोर्ट के समीप स्थान की तलाश की जा रही है।

  • महिला सशक्तीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में देवभोग प्रसाद योजना से महिलाएं सशक्त बन रही हैं। पिछले सीजन में केदारनाथ धाम में 1.60 करोड रूपए़ का प्रसाद महिलाओं ने बेचा है। महिला समूहों को सशक्त बनाने के लिए बिना ब्याज के रू0 5 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला सुरक्षा के लिए कल ही एक पैनिक बटन शुरू किया गया है। पैनिक बटन का इस्तेमाल आपात स्थिति में बहन, बेटियां कर सकती हैं। इसे कीरिंग, ब्रैसलेट अथवा अन्य किसी रूप में महिलाएं अपने पास रख सकती हैं। कार्यस्थल पर शोषण की शिकायतों के निस्तारण व सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने हेतु SHE-BOX अधिकार दिया गया है। जिसमें कोई भी पीड़ित शिकायत दर्ज करा सकती है। मातृ वन्दना योजना में 63,098 महिलाओं को मिला अनुदान दिया गया है।

उत्तराखण्ड सहकारी डेरी फेडरेशन के माध्यम से आंगनबाडी केन्द्रों पर आने वाले 03 से 06 वर्ष के लगभग 2.50 लाख बच्चों को सप्ताह में 02 दिन मीठा दूध उपलब्ध कराया जायेगा। इससे कुपोषण से छुटकारा मिल सकेगा। प्रदेश के पौष्टिक आहार ऊर्जा की केन्द्र सरकार द्वारा भी सराहना की गयी है। इस आहार को भी आंगनबाडी केन्द्रों के माध्यम से वितरण किया जा रहा है।





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