हल्द्वानी : आजादी की लड़ाई की प्रतीक कहे जाने वाले सूती के तिरंगे झंडा का अपना ही महत्व हैl देश को आजाद कराने में स्वाधीनता के सिपाहियों ने खादी के तिरंगे के साथ अंग्रेजों से लोहा लेते हुए उनको भारत छोड़ने को मजबूर कर दिया था। जिसके बाद लोगों में तिरंगे के प्रति देश प्रेम की भावना जगी और तिरंगे के माध्यम से आज भी वो अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति जता रहा है। किसी दौर में लोग आजादी का जश्न मनाने के लिए तिरंगे की खरीदारी गांधी आश्रम से झंडा लेकर देश प्रेम के जज्बे को दर्शाते थेl लेकिन आज बदलते दौर में भी खादी का तिरंगे खरीदने के प्रति लोगों में रुचि देखने को मिल रही है।

गणतंत्र दिवस नजदीक है ऐसे में लोग तिरंगे झंडे की खरीदारी में लगे हुए हैं। सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं में झंडा रोहण के लिए लोग खादी भंडार आश्रम पहुंचकर अलग अलग साइजों के झंडे की खरीददारी कर रहे हैं। गांधी आश्रम के प्रबंधक का कहना कि गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडे के बिक्री में इजाफा होता है। गांधी आश्रम में 50 रुपए से लेकर ढाई हजार रुपये तक के तिरंगे झंडे उपलब्ध है। लोग अपने बजट के हिसाब से झण्डे की खरीदारी कर हैं। आश्रम में शुद्ध खादी के बने हुए तिरंगे मिलते हैं ऐसे में लोग खादी के झंडे खरीदना पसंद कर रहे है।

बाजारों में प्लास्टिक के झंडे पूरी तरह से प्रतिबंध है। लेकिन बदलते दौर और लोगों में देश प्रेम के जज्बे के चलते तरह-तरह के तिरंगे के आइटम बाजारों में देखने को मिल रहे है। लेकिन आज भी खादी के बने हुए तिरंगे का महत्व अलग ही है और लोग जमकर खादी के तिरंगे को खरीदारी कर रहे हैं।





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