चमोली : बड़ी शर्म की बात है जहां डबल इंजन सरकार की बात कर राज्य के विकास की बात की जाती है वहां लोगों को खुद अपने लिए सड़क बनानी पड़ रही और खुद अपनी समस्या को निपटाने के लिए आगे आना पड़ रहा है जबकि की राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद इस सड़क का शिलान्यास कर चुके हैं. बावजूद इसके सब अधिकारी और मंत्री नींद में हैं.

खुद सड़क बनाने को मजबूर गांव वाले, सता रहा ये डर

जी हां मामला चमोली जिले के गैरसैंण विकासखंड स्थित स्यूणी मल्ली का है. जहां लोगों ने मांझी फिल्म की तरह खुद बीते 6 दिन से श्रमदान कर आगरचट्टी-स्यूणीमल्ली (छह किमी) मोटर मार्ग के निर्माण में जुटे हुए हैं। आपको बता दें गांव वाले अभी तक सिविल भूमि में 55 मीटर से अधिक सड़क तैयार कर चुके हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है सप्ताहभर के अंदर वनभूमि में सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ होने पर वन विभाग इसमें अड़चन डाल सकता है।

लेकिन ग्रामीणों ने ठान रखी है कि वे किसी हाल में निर्माण कार्य नहीं रोकेंगे और सड़क को पूरा बनाकर रहेंगे.

6 जनवरी 2017 को जब सीएम त्रिवेंद्र रावत ने किया इस सड़क का शिलान्यास

वहीं सड़क निर्माण संघर्ष समिति के अध्यक्ष जमन सिंह व ग्राम प्रधान लीला देवी ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण बीते 22 साल से आगरचट्टी-स्यूणीमल्ली मोटर मार्ग के निर्माण को संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 6 जनवरी 2017 को जब सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस सड़क का शिलान्यास किया था तो गांव वालों में आशा की किरण जगी थी लेकिन वो धरी की धरी रह गई. जब बात बर्दास्त के बाहर हो गई तो बीती 7 जनवरी को गांववालों ने खुद गैंती-फावड़े उठाकर सड़क बनानी शुरु कर दी.

और हैरानी इस बात की है कि उच्चाधिकारियों औऱ जनप्रतिनिधियों की इस बात की खबर है कि गांव वाले सड़का निर्माण कर रहे हैं फिर भी कोई सुध लेने नहीं पहुंचा.

सड़क न होने के कारण ये परेशानी हो रही

सड़क न होने के कारण गांव के 50 से अधिक बच्चों को आठवीं से आगे की पढ़ाई के लिए मेहलचौरी और आगरचट्टी की 14 से 16 किमी की दूरी रोजाना पैदल जाना पड़ता है.

जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है

सड़क न होने का सबसे ज्यादा नुकसान बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ता है। ग्राम प्रधान लीला देवी बताती हैं कि बीते एक दशक में 28 ग्रामीण समय पर अस्पताल न पहुंचने के कारण दम तोड़ चुके हैं।

आगरचट्टी-स्यूणी मल्ली सड़क पर एक नजर

सबसे पहले वर्ष 1996 में उठी थी सड़क निर्माण की मांग।

वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद बलवती हुई सड़क बनने की उम्मीद।

2011 में ग्रामीणों ने शुरू किया सड़क निर्माण के लिए आंदोलन।

21 दिसंबर 2015 को सैकड़ों ग्रामीणों किया तहसील मुख्यालय पर उग्र प्रदर्शन।

6 जनवरी 2016 को ग्रामीणों ने तहसील में प्रदर्शन कर गांव में शुरू की भूख-हड़ताल।

8 जनवरी 2016 को तत्कालीन एसडीएम केएस नेगी व पीएमजीएसवाइ के अभियंता सचिन कुमार ने 15 दिन में समरेखण कार्य संपन्न कराने का दिलाया भरोसा।





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top