देहरादून : 15 जनवरी को पूरा देश आज के दिन को सेना दिवस के रुप में मनाता है. इस बार देश 71वां सेना दिवस मना रहा है। बता दें कि आज ही के दिन 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान ली थी। करियप्पा भारतीय सेना के प्रथम कमांडर इन चीफ थे। इसके अलावा आज के दिन देश की सुरक्षा में शहीद होने वाले वीरों के साहस एवं उनकी उपलब्धियों को याद किया जाता है।

जनरल बिपिन रावत करेंगे वीरों को सम्मानित

आज दिल्ली स्थित करियप्पा परेड ग्राउंड में परेड का आयोजन होगा। यहां कार्यक्रम में जनरल बिपिन रावत अदम्य साहस एवं वीरता के लिए सैन्य कर्मियों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित करेंगे। यह समारोह हर साल 15 जनवरी को जनरल केएम करिअप्पा के सम्‍मान में मनाया जाता है, जो आजाद भारत के पहले सेना प्रमुख बने थे।

भारतीय थल सेना के कमांडर इन चीफ का संभाला था प्रभार 

उन्‍होंने आज ही के दिन यानी 15 जनवरी, 1949 को आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल सर फ्रांसिस बूचर से भारतीय थल सेना के कमांडर इन चीफ का प्रभार संभाला था। आइये इस मौके पर हम भी भारतीय सेना के बारे में जानते हैं कुछ खास बातें, जो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देती है-

भारतीय सेना का गठन 1776 में कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी सरकार के अधीन हुआ था। फिलहाल देश भर में भारतीय सेना की 53 छावनियां और 9 आर्मी बेस हैं।

समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर दुनिया की सबसे ऊंचा रणक्षेत्र है।

भारतीय सेना ने हालांकि 1962 के युद्ध में चीन से मात खाई, पर 1965 और 1971 के युद्ध में इसने पाकिस्‍तान को धूल चटा दी। भारत और पाकिस्‍तान के बीच 1971 के युद्ध के बाद ही बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।

भारतीय सेना ने 1999 में कारगिल में घुसपैठ पर भी पाकिस्‍तान को करारा जवाब दिया था।

भारतीय सेना के पास एक घुड़सवार रेजिमेंट भी है। दुनिया में इस तरह की अब बस तीन रेजिमेंट्स रह गई हैं, जिनमें से एक भारतीय सेना के पास है।

हिमालय पर्वत की द्रास और सुरु नदियों के बीच लद्दाख की घाटी में स्थित बेली पुल का निर्माण भारतीय सेना ने 1982 में किया था, जो दुनिया का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है।

साल 1949 में जब जनरल करिअप्पा ने आखिरी ब्रिटिश कमांडर इन चीफ जनरल सर फ्रांसिस बूचर से भारतीय थल सेना के कमांडर इन चीफ की जिम्‍मेदारी संभाली थी, उस वक्‍त भारतीय थल सेना में करीब 2 लाख सैनिक थे, जबकि आज यह संख्या 13 लाख से भी ज्यादा है।





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