पुलिस ने एम्स ऋषिकेश में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया. मामले का खुलासा रविवार को पुलिस उपाधीक्षक वीरेंद्र सिंह ने कोतवाली में की.

उन्होंने बताया कि 21 जनवरी को पारस कुमार पुत्र धनी राम निवासी बीएसएम चौक थाना गंग नहर रुड़की ने मुकदमा दर्ज कराया था कि दीपक गोवारी पुत्र इंद्र गोवारी ने उससे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में नौकरी के लिए ढाई लाख रुपए लिए और एक फर्जी नियुक्ति पत्र दिया। जिसके बाद पता चला कि दीपक और उसके साथियों ने नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से लाखों रुपए की धोखाधड़ी की है। पुलिस के मुताबिक मामला दर्ज कर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। पुलिस की टीम ने एम्स के विभिन्न विभागों के सीसीटीवी फुटेज के साथ मोबाइल नंबर की जांच की।

इस मामले में गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। जिनके पास से एक स्कॉर्पियो कार, 12 मोबाइल, एम्स के फर्जी नियुक्ति पत्र, एक लैपटॉप, एक लाख सत्तर हजार रुपए की नगदी बरामद की गर्इ है। फर्जी नियुक्ति पत्रों में एम्स के निदेशक प्रो. रविकांत के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए हैं।

गिरफ्तार लोगों में दीपक गोवारी पुत्र इंदर सिंह निवासी कैनाल रोड थाना राजपुर, सागर पांडे पुत्र हेम चंद्र पांडे निवासी आवास विकास कॉलोनी ऋषिकेश, चिराग गर्ग पुत्र ब्रिज भूषण गर्ग निवासी पार्क रोड थाना पटेल नगर, विक्रम सिंह बिष्ट पुत्र वीरेंद्र सिंह बिष्ट प्रगति पुरम कॉलोनी श्यामपुर थाना, अब्दुल कादिर अंसारी पुत्र मोहम्मद आसिफ अंसारी निकट गुप्ता स्टोर चाणक्य मार्ग सुभाष नगर थाना क्लेमेंट टाउन, अजय रावत पुत्र नरेंद्र सिंह रावत निवासी ग्राम थारी हलदुआ थाना रामनगर, अमित भारती पुत्र अमी चंद निवासी ग्रीन पार्क निरंजनपुर थाना पटेल नगर और अभिषेक पुत्र भवानी निवासी शास्त्री एनक्लेव सुभाष नगर थाना क्लेमेंट टाउन शामिल है। पुलिस ने बताया कि इन सब से पूछताछ के बाद तीन अन्य लोगों की भी नाम सामने आए हैं। जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीम भेजी जा रही है।





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