देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर तबकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसद आरक्षण पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लग गई है। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के गरीबों के आरक्षण संबंधी 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया।

राज्यसभा ने 7 के मुकाबले 165 मतों से सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को पारित किया। यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया गया है और इसीलिए इसे राज्यों की विधानसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब केवल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसद आरक्षण की यह व्यवस्था लागू हो जाएगी।
राज्यसभा ने आरक्षण संबंधी संविधान संबंधी इस बिल को पारित करने से पहले इसे सिलेक्ट कमिटी में भेजने की द्रमुक सांसद कनीमोरी के प्रस्ताव को भी 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया। राज्यसभा में आठ घंटे तक बिल पर हुई मैराथन चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग के गरीबी लोगों को इसके जरिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण में संस्थानों आरक्षण का लाभ मिलेगा।

बिल को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की इसको लेकर यह गंभीरता ही रही कि संविधान संशोधन के जरिये आरक्षण का यह प्रावधान किया जा रहा है। इसीलिए उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान संशोधन की इस प्रक्रिया को मान्य करेगा।

आर्थिक रुप से कमजोर तबकों का ख्याल रखने की पंडित जवाहर लाल नेहरू की संविधान सभा में कही गई बात का आनंद शर्मा की ओर से किए गए उल्लेख का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि यह भारत की परंपरा रही है। अगड़ी जाति के हमारे नेताओं ने दलित-आदिवासी और पिछड़ों को आरक्षण दिया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े समुदाय से होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगड़ी जाति के गरीबों के लिए आरक्षण किया है। इस 10 फीसद आरक्षण में बड़ी आबादी के आने को लेकर उठाए गए सदस्यों के सवालों और आंकड़ों को गैरवाजिब बताते हुए गहलोत ने स्पष्ट किया कि केवल सामान्य वर्ग के गरीबों को ही यह आरक्षण मिलेगा।

गहलोत ने इस पूर्व विधेयक पेश करते हुए आपाधापी में इसे लाने को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए सवालों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत और इरादे दोनों अच्छे हैं। सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देकर उनका सशक्तिकरण किया जाएगा और सभी दलों को इसका समर्थन करना चाहिए।

कांग्रेस की ओर से आनंद शर्मा ने चर्चा की शुरुआत करते हुए सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने के बिल का समर्थन किया। हालांकि सरकार की अंतिम बेला में बिल लाने की पहल को पांच राज्यों के चुनाव में हार के बाद सरकार का अचानक लिया गया फैसला बताया। उन्होंने कहा कि 2014 में सब्जबाग दिखाते हुए तमाम वादे किए गए थे मगर इसमें कोई पूरा नहीं हुआ और पांच राज्यों के चुनाव में जनता ने इन्हें रास्ता दिखा दिया। इसी घबराहट में सत्ता से बाहर होने के डिपारचर लाउंज में खड़ी सरकार ने यह कदम उठाया है।

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस बिल का समर्थन इसलिए कर रही कि पार्टी ने भी अपने चुनाव घोषणापत्र में इसका वादा किया था। बिल में आरक्षण के लिए शर्तो की चर्चा करते हुए शर्मा ने कहा कि 8 लाख रुपये तक की आय और 5 एकड़ जमीन के साथ जो मानक तय किए हैं उसमें करीब 98 फीसद आबादी आएगी। इसका अर्थ यह होगा कि इतनी आबादी को 10 फीसद कोटे में ही संघर्ष करना होगा।

कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार और सरकारी कंपनियों में बीते सालों में लगातार हजारों हजार नौकरियां खत्म होने के सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस आरक्षण का मतलब ही क्या होगा जब नौकरियां ही नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद सरकार राजनीति कर रही है क्योंकि अगर ऐसा नहीं था तो फिर महिला आरक्षण बिल को सरकार ने पांच साल में क्यों नहीं पारित कराया। सरकार को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस साथ देने को तैयार है वह लोकसभा को बुलाकर महिला आरक्षण बिल पारित कराने का साहस करे।

शर्मा ने कहा कि देश की जनता भोली जरूर है मगर मूर्ख नहीं और सरकार की राजनीति को वह भी समझती है और चुनाव में किए गए वायदों का हिसाब मांगेगी। सपा के रामगोपाल यादव ने सवर्ण गरीबों के आरक्षण का समर्थन करते हुए मांग उठाई कि ओबीसी का आरक्षण उसकी जनसंख्या के हिसाब से बढ़ाते हुए 54 फीसद किया जाना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों के लिए भी इसी आधार पर आरक्षण की मांग उठाई।

बसपा के सतीश चंद्र मिश्र ने अगड़ी जाति के गरीबों के आरक्षण का समर्थन किया मगर एससी व एसटी को प्रमोशन में आरक्षण देने संबंधी बिल पारित नहीं करने को लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठाए। खासतौर पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान पर मिश्र ने इसको लेकर निशाना साधा और कहा कि आरक्षण का सरकार का यह छक्का बाउंड्री पार करने वाला नहीं है।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने विधेयक का समर्थन किया और साथ ही संघ परिवार पर आरोप लगाया कि वह एससी-एसटी आरक्षण का प्रावधान खत्म करने की पैरोकारी करती रही है और यह उसी प्रयास का हिस्सा है।





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top