हल्द्वानी : बचपन से ही कुछ अलग कर गुजरने की तम्मना और कड़ी मेहनत के सहारे हल्द्वानी निवासी प्रकाश उपाध्याय ने विश्व का सबसे छोटा जहाज बनाने का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जो गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है, इस रिकॉर्ड के साथ ही प्रकाश ने 5 व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाकर उत्तराखंड का नाम देश में रोशन किया है।

मेडिकल कॉलेज हलद्वानी में आर्टिस्ट के पद पर तैनात हैं प्रकाश

प्रकाश उपाध्याय मेडिकल कॉलेज हलद्वानी में आर्टिस्ट के पद पर तैनात है, इस बार प्रकाश ने विश्व का सबसे छोटा जहाज बनाने में रिकॉर्ड कायम किया है, जिसे 1.20 सेंटीमीटर लम्बी व 0.50 सेंटीमीटर चौड़ी बोतल में डाला गया है, बोतल के मुंह का आकार 0.15 सेंटीमीटर है गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने इसे वर्ष 2018 के रिकॉर्ड में शामिल किया है. इससे पहले 1956 में ब्रिटेन के अर्थ वी पेडलर ने 2.3 सेंटीमीटर लंबी और 0. 90 सेंटीमीटर चौड़ी व 0.20 सेंटीमीटर मुंह वाली कांच की बोतल में जहाज का मॉडल स्थापित करने का कारनामा किया है।

बनाई धार्मिक पुस्तक हनुमान चालीसा जिसका आकार 3x4x4 मिलीमीटर है

प्रकाश के नाम पहले से ही चार रेकॉर्ड दर्ज है, जिसमे उनके हाथ से बनाई धार्मिक पुस्तक हनुमान चालीसा जिसका आकार 3x4x4 मिलीमीटर है, इसके अलावा 3x4x4 मिलीमीट की हाथ से बनाई एक अन्य पुस्तक भी है, वही प्रकाश ने 50वर्ग मिलीमीटर आकार का मिनियेचर चरखा भी बनाया है, इसके अलावा 5 मिली मीटर लंबी और 0.5 मिलीमीटर मोटी पेंसिल बनाकर भी प्रकाश ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।

प्रकाश को दिल्ली की गांधी आर्ट गैलरी में सम्मान, नटराज कला रत्न सम्मान

आपको बता दें प्रकाश को पेंटिंग का भी बहुत शौक है, इससे पहले मेरठ में तीन हज़ार पेंटरों ने विश्व की सबसे लम्बी पेंटिंग बनाकर चीन का रिकॉर्ड भारत के नाम कर गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया था. प्रकाश को अब तक दिल्ली की गांधी आर्ट गैलरी में सम्मान, नटराज कला रत्न सम्मान दिया जा चुका है. प्रकाश इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, यूनिक बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड, अशिष्ट वर्ल्ड रिकॉर्ड, और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं।

कहते है की प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती, जिसका जीता जागता उदाहरण हल्द्वानी के प्रकाश उपाध्याय है, पहले ही चार रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके प्रकाश अब एक और नया कीर्तिमान बना चुके है जो उत्तराखण्ड के लिए एक बड़े गौरव की बात है।





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