• बिना नक़्शे के बने होटल पर क्यों है प्राधिकरण नरम
  •  दवाख़ाने के लाइसेंस में भी हैं कई झोल 
  • शैक्षणिक संस्थानों के बीच आबकारी विभाग ने दिया मयख़ाने का लाइसेंस
  • होटल स्वामी के खिलाफ चल रहे कई आपराधिक मामले !

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

ऋषिकेश : उत्तराखंड के अस्तित्व में आने के बाद से  प्रदेश के तराई के इलाकों में दिल्ली,हरियाणा और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के अपराधियों ने शरण ही नहीं ली बल्कि ये लोग यहाँ के तमाम व्यापार तक में आ गए हैं।  उत्तराखंड में कौन कहाँ से आ रहा है और उसका पिछला इतिहास क्या रहा सूबे की मित्र पुलिस सहित इनके व्यापारों को लाइसेंस देने वाले विभागों तक को कोई सरोकार नहीं रहता है। परिणामस्वरूप ऐसे लोग उत्तराखंड के शांत वातावरण को दूषित करने पर लगे हुए हैं। 

 ऋषिकेश वैसे तो तीर्थ नगरी के साथ ही विश्व की योगा केंद्र के रूप में विश्वभर में अपना एक अलग स्थान रखता है।  राज्य के अस्तित्व में आने से पहले यहां नगर पालिका जो अब नगर निगम का रूप ले चुकी है के क्षेत्र में न तो शराब के बार ही खुल पाए और न ही मांस की दुकानें।  उत्तरप्रदेश के अंतर्गत इस इलाके का धर्मत्व सरकारों सहित स्थानीय लोगों ने सुरक्षित रखा रहा , लेकिन  राज्य के अस्तित्व में आने के बाद इस पवित्र शहर के प्रवेश द्वारों पर श्रद्धालुओं का स्वागत शराब के बार और मांस की रैस्टौरेंट से  होने लगा है।

नटराज चौक पर जहाँ आबकारी विभाग ने एक बार का लाइसेंस पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के शासन काल में दे दिया गया तो वहीं धार्मिक आस्था का दम्भ भरने वाली भाजपा सरकार ने बीती दिसम्बर को वीरभद्र मार्ग पर एक होटल हेरिटेज को बार का लाइसेंस देकर धार्मिक स्थानों के संरक्षण और उनकी पवित्रता का दावा यथावत रखने वाली भाजपा की सोच को उजागर कर दिया कि उनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है। कहने को तो धार्मिक क्षेत्र में होटल का नाम हेरिटेज रखा गया है लेकिन कहीं भी इस इलाके के पुरातात्विक भावनाओं और श्रद्धालुओं की भावनाओं का यहाँ संरक्षण नहीं किया जा  रहा है।

इतना ही नहीं दिल्ली से यहाँ आकर इसके स्वामी स्वामी हरिदास पुत्र स्वर्गीय श्री रामदास पर कई मामले जहाँ ऋषिकेश कोतवाली में IPC की धारा 420 में दर्ज हुए हैं वहीँ दिल्ली से सटे गौतमबुद्धनगर पुलिस थाने दादरी में FIR नंबर 1213 दिनांक  29 दिसंबर 2018  में होटल स्वामी हरिदास पुत्र स्वर्गीय श्री रामदास के विरुद्ध IPC की धारा 420 ,467 .468 ,471 दर्ज है वही यहाँ इनके खिलाफ कई मामले और भी दर्ज बताये गये हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि यहाँ एक अवैध रूप से मेडिकल स्टोर भी चलाया जा रहा है जिसका पंजीकरण होटल के भूतल पर किया गया है लेकिन मेडिकल स्टोर सड़क पर स्थित प्रथम तल से चलाया जा रहा है। 

इतना ही नहीं हरिद्वार -ऋषिकेश विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने यह भी बताया है कि यह होटल हरिद्वार-ऋषिकेश विकास प्राधिकरण से अभी तक स्वीकृत तक नहीं है। लेकिन अवैध निर्माण का चालान किया जा चुका है। सबसे बड़े आश्चर्य की बात तो यह है कि यह होटल जहाँ अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIMS) के पास स्थित है वहीं इसके कुछ ही दूरी पर विधानसभा अध्यक्ष का आवास तो है ही वहीं  सीमा डेंटल  कॉलेज जैसे संस्थान भी  इसी हॉटेल के आसपास है।इतना ही नहीं जिस इलाके में यह होटल अनधिकृत रूप से बना हुआ है वहीँ से कुछ ही दुरी पर विश्वप्रसिद्ध वीरभद्र महादेव का मंदिर भी है। 

गौरतलब हो कि आबकारी विभाग के अधिकारियों ने इतने शिक्षण संस्थानों सहित विश्व प्रसिद्ध मंदिर के आसपास कैसे अनधिकृत होटल निर्माण को कैसे  बार का लाइसेंस दे दिया यह विचारणीय है। लेकिन लोगों का कहना है कि आम पर आबकारी के नियम लागू होते हैं लेकिन ख़ास पर इनको नज़रअंदाज कर दिया जाता है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही इस होटल के आसपास शराबियों का जमघट लगना शुरू हो जाता है जो देर रात तक स्थानीय लोगों की एम्स में आवाजाही तक को बाधित कर देता है जिससे तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ती है वहीँ बीते  कुछ माह एम्स के छात्रों और  आवास विकास कॉलोनी के निवासियों के बीच संघर्ष इसी होटल से शराब पीकर आये छात्रों के कारण हुआ बताया जा रहा है। 





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