दालचीनी (Cinnamon) एक छोटा सदाबहार पेड़ है, जो कि 10–15 मी (32.8–49.2 फीट) ऊंचा होता है, यह लौरेसिई (Lauraceae) परिवार का है. यह श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में बहुतायत में मिलता है. इसकी छाल मसाले की तरह प्रयोग होती है. इसमें एक अलग ही खुशबू होती है, जो कि इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखती है.

दालचीनी के औषधीय उपयोग-:

1. पाचन विकार के लिए

  • पाचन में सुधार लाने और जठर संबधी विकारों के लिए इन 4 अलग-अलग तरीकों से दालचीनी का उपयोग कर सकते है.
  • अपच, पेटदर्द और सीने में जलन महसूस होने पर आप दालचीनी, सौन्ठ, जीरा और इलायची सम मात्रा में लेकर पीसकर गरम पानी के साथ ले सकते हैं.
  • दालचीनी, काली मिर्च पावडर और शहद आदि मिलाकर भोजन के बाद लेने से पेट अफारा नहीं होता.
  • दालचीनी से जी मचलना, उल्टी और जुलाब रुकते है.
  • कब्ज और गैस की समस्या कम करने के लिये दालचीनी के पत्तों का चूर्ण और काढा बना कर लिया जाता है.

2. जुकाम के लिए

  • चुटकी भर दालचीनी पावडर पानी में उबालकर, उसीमे चुटकी भर काली मिर्च पावडर और शहद डालकर लेने से सर्दी-जुकाम, गले की सुजन एवं मलेरिया कम हो जाता है.

3. स्त्री रोग

  • गर्भाशय के विकार और गनोरिया में दालचीनी का उपयोग किया जाता है.
  • प्रसव के बाद एक महिने तक दालचीनी का टुकडा चबाने से गर्भ धारणा को टाला जा सकता है.
  • दालचीनी से माता के स्तन का दूध बढ़ता है.
  • गर्भाशय का संकुचन होता है.

4. खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए

  • दालचीनी के पत्ते और छाल के उपयोग से केक, मिठाई और खाने का स्वाद बढाया जाता है.
  • दालचीनी का तेल इत्र, मिठाई और पेय में उपयोग किया जाता है.




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