मकर संक्रान्ति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है. मकर संक्रान्ति पूरे भारत और नेपाल में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है. पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है तभी इस पर्व को मनाया जाता है. वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है , इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है. मकर संक्रान्ति उत्तरायण से भिन्न है.

मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायणी भी कहते हैं , यह भ्रान्ति है कि उत्तरायण भी इसी दिन होता है. संभव है की इसी वजह से इसको व उत्तरायण को कुछ स्थानों पर एक ही समझा जाता है. तमिलनाडु में इसे पोंगल नामक उत्सव के रूप में मनाते हैं जबकि कर्नाटक, केरल तथा आंध्र प्रदेश में इसे केवल संक्रांति ही कहते हैं.

इस बार 14 जनवरी 2019 को नहीं बल्कि 15 जनवरी 2019 को मनाया जा रहा है.

मकर संक्रांति के मौके पर गंगा नदी के किनारे हरिद्वार से लेकर गंगा सागर, वाराणसी और प्रयागराज में त्रिवेणी के संगम पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है. इस मौके पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भी सिख भक्तों ने माथा टेका. मकर संक्रांति के मौके पर देशभर में गंगा सहित पवित्र नदियों पर सोमवार सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है.

इस जगहों पर प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं तो वहीं प्रायगराज में इस बार 15 जनवरी से कुंभ 2019 की शुरुआत होने जा रही है. बता दें कि इस बार 14 जनवरी सोमवार यानि आज से रात 8 बजकर 8 मिनट पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा. जिसके साथ ही मकर संक्रांति का त्योहार शुरू हो जाएगा.

हिंदू मान्यता के मुताबिक, कहते हैं कि इस दिन पवित्र गंगा में डुबकी लगाने से इंसान और उनके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं. इसे लोग शाही स्नान भी कहते हैं.





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