• डीएम ने आंदोलन के लिए अवकाश स्वीकृत न करने के दिए निर्देश
  • आपातकालीन सेवाओं को आंदोलन के  दायरे से रखा गया बाहर
  • आन्दोलन  तिथि को कर्मचारियों के वेतन आहरित न करने के निर्देश

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून । सरकार की ओर से वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में वार्ता के लिए समय तय होने के बावजूद आवास भत्ते समेत दस सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड के तीन लाख अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक-समन्वय समिति गुरुवार को सामूहिक अवकाश कार्यक्रम पर अडिग है। वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ बातचीत करने को कहा गया है। कर्मचारियों के हितों को यदि कहीं प्रभावित किया जा रहा है तो उस पर चर्चा हो सकती है। कर्मचारियों के हड़ताल पर अडिग रहने पर उन्होंने कहा कि जो भी नियम होंगे उनके अनुसार विचार किया जाएगा। वहीं कर्मचारियों की समिति ने सरकार के कदम का स्वागत तो किया है लेकिन अपना कार्यक्रम भी यथावत रखा है और वार्ता के बाद ही आगे की रणनीति पर निर्णय लेने की बात कही है।

वहीं अस्थायी राजधानी में उत्तराखण्ड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षकों की 31 जनवरी एवं चार फरवरी को प्रस्तावित आन्दोलन कार्यक्रम के अन्तर्गत किसी भी प्रकार का अवकाश स्वीकृत न करने हेतु अपर मुख्य सचिव, कार्मिक एवं सतर्कता उत्तराखण्ड शासन द्वारा दिये गये निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी एस.ए मुरूगेशन ने जनपद स्थित सभी कार्यालयाध्यक्षों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक  अधिकारी (राजस्व) एवं प्रशासनिक अधिकारी (स्थापना) को अपने अधीनस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों के प्रस्तावित आन्दोलन हेतु अवकाश स्वीकृत न करने के निर्देश दिये है। उन्होंने अवगत कराया कि यदि कोई अधिकारी/कर्मचारी उक्त तिथि को सक्षम अधिकारी से अवकाश स्वीकृत कराये बिना कार्य बहिष्कार करते हैं तो उक्त तिथि को उनका वेतन आहरित न करने के निर्देश दिये। उन्होंने समस्त कार्यालयाध्यक्षों को शासनादेश अनुपालन सुनिश्चित करने के साथ ही अनिवार्यता सेवा सम्बन्धी विभाग जल संस्थान/विद्युत विभाग एवं नगर निगम से सम्बन्धित विभाग अनिवार्यता सेवायें बाधित न हो इस हेतु वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिये है।

इधर आन्दोलन के दौरान समिति ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, रोडवेज, विद्युत व जल संस्थान आदि सेवाओं को आंदोलन के दायरे से बाहर रखा है। समिति के आह्वान पर तमाम विभागों में कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश के लिए आवेदन भी कर दिया है। कर्मचारियों के इस तेवर को देखते हुए सभी विभागों ने अपने यहां आंदोलन के लिए अवकाश लेने पर रोक लगा दी है। वहीं, शासन ने सख्ती दिखाते हुए सचिवालय में कर्मचारियों की उपस्थिति व अनुपस्थिति जांचने के लिए पांच दस्तों का गठन किया है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि कर्मचारियों के साथ वार्ता के दरवाजे खुले हैं। अगर कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेते हैं तो नियमानुसार विचार किया जाएगा।

उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी-शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक मंडल को बुधवार अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वार्ता के लिए आमंत्रित किया था। इस दौरान उन्होंने मांगों पर उचित कार्यवाही का आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित करने को कहा। इस पर समिति ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता करने की शर्त रखी।

इसके अलावा समिति ने कुछ और सुझाव अपर मुख्य सचिव के सामने रखे। हालांकि, यह प्रारंभिक वार्ता सफल नहीं हो पाई। शाम को कार्मिक विभाग ने समन्वय समिति को वित्त मंत्री प्रकाश पंत की अध्यक्षता में होने वाली बैठक की सूचना भेजते हुए आंदोलन स्थगित करने को पत्र लिखा। कर्मचारियों ने अपने तेवर बरकरार रखते हुए शासन को स्पष्ट किया कि जनहित को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की आपात सेवाओं, रोडवेज के बस संचालन, विद्युत उत्पादन और वितरण से सीधे जुड़े कार्मिक और जल संस्थान के जल आपूर्ति से जुड़े कार्मिकों को सामूहिक अवकाश कार्यक्रम से छूट दी गई है। शेष सभी अधिकारी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। वित्त मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में वार्ता के बाद आगे के कार्यक्रम पर निर्णय लिया जाएगा।





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