देहरादून की सड़कों पर ट्रैफ़िक कंट्रोल करते हुए आपने इस व्यक्ति को जरुर देखा होगा. जो की खाकी वर्दी पहने रहते हैं लेकिन ये व्यक्ति कोई पुलिसकर्मी नहीं बल्की मित्र पुलिस का दोस्त है जो की बोल-सुन नहीं सकते. इसे उनके साथ अन्याय ही कहेंगे. जो किसी दूसरे के फर्ज को उनके साथ तालमेल बनाकर बखूबी निभा रहे हैं. इनका नाम है सचिन राणा. जो की पुलिसकर्मियों की तरह ही ट्रेफिक को अच्छा खासे तरीके से कंट्रोल करते हैं.

व्यस्त चौराहे पर ट्रैफ़िक कंट्रोल करते हैं सचिन

आपको बता दें सचिन राणा दून अस्पताल के पास एक व्यस्त चौराहे पर ट्रैफ़िक कंट्रोल करते हैं और पुलिसकर्मी इन्हें अपना दोस्त मानते हैं और इन्होंने भी यातायात को कंट्रोल करने की ठानी…जो की बखूबी से कर रहे हैं. बता दें जब भी पुलिस को ट्रेफिक कंट्रोल में इनकी जरुरत होती है ये दौड़े चले आते हैं और पुलिसकर्मि की तरह ही अपना फर्ज निभाते हैं. उत्तराखंड की यातायात पुलिस के लिए सचिन राणा किसी वरदान से कम नहीं है. सचिन राणा का ये काम काबिले तारीफ है.

तत्कालीन एसएसपी केवल खुराना ने दी सचिन को एक साइकिल 

जानकारी के लिए बता दें सचिन राणा के पिता की मौत के बाद उनका कोई सहारा नहीं रहा. लगभग सात साल पहले वह पुलिस के संपर्क में आए थे. सचिन राणा के काम से खुश होकर तत्कालीन एसएसपी केवल खुराना ने उसे एक साइकिल भी दी. सचिन राणा का खर्च एनजीओ द्वारा चलता है. वहीं दून अस्पताल की पुलिस चौकी उनका घर है और अस्पताल उनकी कैंटीन.

ये उन लोगों के लिए अच्छा संदेश है जो अपने में किसी कमी को लेकर आगे बढ़ने का और आरक्षण का रोना रोते हैं.





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top