प्रयागराज कुंभ ने बड़ी संख्या में जीवन के सभी तबके के लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है. गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम पर मकर संक्रांति के पहले स्नान पर्व पर 15 जनवरी को संगम में पवित्र डुबकी लगाने के लिए दुनिया भर से बड़ी संख्या में संत और ऋषि, आम श्रद्धालु और पर्यटक प्रयागराज पहुंच रहे है. अखाड़ों का पहला शाही स्नान तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण है.

एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य के संक्रमण को ही संक्रान्ति कहते है. भारतीय ज्योतिष के अनुसार बारह राशियां मानी गयी हैं- मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन, जनवरी महीने में प्रायः 14 तारीख को जब सूर्य धनु राशि से (दक्षिणायन) मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होता है तो मकरसंक्रांति मनायी जाती है. लोग व्रत स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करते हैं.

प्रयागराज में कुंभ मेला हिंदू कैलेंडर के माघ महीने में आयोजित होता है. प्रयागराज कुंभ मेले में हर 6 साल पर और महाकुंभ हर 12 साल पर आयोजित होता है. पहले वे अर्ध कुंभ और कुंभ के रूप में जाने जाते थे. लेकिन इस साल उत्तराखंड सरकार ने घोषणा की है कि अर्ध कुंभ को कुंभ के नाम से और कुंभ को महाकुंभ के रूप में जाना जाएगा. कुंभ के दौरान स्नान की सही तिथियां हिंदू ज्योतिष के अनुसार निर्धारित की जाती हैं.

इस वर्ष प्रयागराज कुंभ 3200 हेक्टेयर भूमि में फैला है जो 2013 के महाकुंभ की तुलना में लगभग 700 हेक्टेयर अधिक है. इसे 20 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है जबकि 2013 में केवल 18 क्षेत्रों को विकसित किया गया था. अधिकांश क्षेत्रों ने अपना आकार ले लिया है और जो कल्पवासी भक्त हिंदू कैलेंडर के अनुसार पौष पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक एक महीना वहां बिताते हैं,वे अभी भी वहां पहुंच रहे हैं. उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने तीर्थयात्रियों के लिए 6000 बसों को सेवा में शामिल किया है और रेलवे ने राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से विशेष रेलगाड़ियां भी शुरू की हैं. प्रयागराज जिले में स्थित इलाहाबाद जंक्शन और अन्य रेलवे स्टेशनों पर अधिकांश लंबे रूट की ट्रेनों का ठहराव दिया गया है. यूपीएसआरटीसी ने तीर्थ यात्रियों को अस्थायी बस स्टेशनों और रेलवे स्टेशनों से मेला क्षेत्र में लाने के लिए शहर में 500 बसों की शुरुआत की है. नई दिल्ली, कोलकाता, नागपुर, भोपाल, देहरादून, इंदौर, बेंगलुरु, अहमदाबाद और लखनऊ से प्रयागराज सहित विभिन्न प्रमुख शहरों के लिए कई हवाई सेवाएं शुरू की गई हैं. नई शुरू की गई उड़ानों को संचालित करने के लिए बहुत जल्द ही एक नवनिर्मित नागरिक हवाई अड्डा परिचालन के लिए खोल दिया गया है.

मेला प्रशासन ने मेला क्षेत्र में डोरमैट्री आकार के 87 सार्वजनिक आवासों की स्थापना की है जिससे कि बाहर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को सस्ती दरों पर सुविधायें उपलब्ध कराई जा सकें. अन्य एजेंसियों ने विभिन्न स्थानों में पर्यटकों को सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्च गुणवत्ता वाले तम्बू शहर भी विकसित किए हैं. मेला के अरेल क्षेत्र में अप्रवासी भारतीयों के लिए विशेष तम्बू कॉलोनी स्थापित की गई है, जो 24 जनवरी को आने वाले हैं. तीर्थयात्री और पर्यटक कुंभ मेला वेबसाइट के माध्यम से अपनी जरूरतों एवं बजट के अनुसार टेंट बुक कर सकते हैं.

संगम पर पवित्र डुबकी के लिए 8 किलोमीटर लंबे स्नान क्षेत्र का विकास किया गया है और इसी तरह मेला के विभिन्न क्षेत्रों में गंगा नदी के तट पर कई अन्य घाट भी विकसित किए गए हैं. कुंभ के दौरान लगभग 12 करोड़ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आने की उम्मीद है. पहले स्नान पर्व और शाही स्नान के सुचारू रूप से संपन्न होने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है.

प्रयागराज के जिला प्रशासन ने 14,15 और 16 जनवरी सहित तीन दिनों तक 12 वीं कक्षा तक के सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया है और डिग्री कॉलेजों को भी सलाह दी है कि वे कुंभ के त्यौहारों पर स्नान के लिए भारी भीड़ को देखते हुए छात्रों को असुविधा से बचाने के लिए उन्हें बंद कर दें. शहर में बसों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है और प्रयागराज शहर के सभी सात प्रवेश बिंदुओं पर अस्थायी बस स्टेशन का निर्माण किया गया है.





0 comments:

Post a Comment

See More

 
Top