• जहरीली शराब से हो रही मौतों का सिलसिला जारी !

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के पांच गांवों में पसरे सन्नाटे के बीच जहरीली शराब पीकर मरने वालों की संख्या 34 तक पहुंच गई है। जबकि उत्तरप्रदेश के सहारनपुर जिले के तीन थाना क्षेत्रों के 17 गांव में मौत की संख्या 43 से बढ़कर शनिवार शाम तक 80 हो चुकी है। प्रभावित गांवों से बीमारों का अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। पूरे दिन में 52 लोग सिविल अस्पताल पहुंचे, इन सभी को अन्यत्र रेफर कर दिया गया। 70 से ज्यादा बीमार लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें 35 की हालत गंभीर बताई जा रही है। दोनों राज्यों में जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों की संख्या 114 तक जा पहुंची है मौतों का यह आंकड़ा अभी और भी बढ़ने की संभावना जिला प्रशासनों ने जताई है। इधर उत्तरप्रदेश के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी मृतक आश्रितों को दो-दो लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये आर्थिक सहायता देने को एलान किया। जबकि इससे पहले कुछ सुबह आश्रितों ने मुआवजे की मांग को लेकर सुबह शव ले जाने से मना कर दिया था।

जहरीली शराब से मरने वालों का सिलसिला झबरेड़ा थाना क्षेत्र के बाल्लुपुर, जहाजगढ़, भलस्वागाज, बिंड और खरक गांव में गुरुवार शाम से श़ुरू हुआ, जो अब तक जारी है। इन गांवों के 34 लोगों की अभी तक मौत हो चुकी है। इन सभी ने बाल्लुपुर और बिंड गांव से कच्ची शराब खरीदी थी। इन दोनों ही गांवों में काफी लंबे समय से कच्ची शराब का धंधा चल रहा था। पुलिस, प्रशासन और आबकारी विभाग के कारिंदे इस तरफ आंखें मूंदे रहे। इतनी बड़ी संख्या में मौत होने के बाद इन गांवों में जिम्मेदारों की कदमताल दिखी।

शनिवार सुबह सिविल अस्पताल में मृतकों पोस्टमार्टम शुरू हुआ। आठ शवों का पोस्टमार्टम हुआ ही था कि तभी भीम आर्मी के कुछ नेता आकर कार्रवाई का विरोध करने लगे। उनके साथ कुछ परिजन भी थे। भीम आर्मी कार्यकर्ता मृतक आश्रितों को दस लाख रुपये मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग करने लगे। इसके चलते तीन घंटे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया बाधित रही। हालांकि, बाद में परिजनों ने खुद को इस मांग से अलग कर लिया, तब जाकर पोस्टमार्टम शुरू हो सका।

जहरीली शराब पीने से हुई इन मौतों के चलते रुड़की इलाके के प्रभावित गांवों में किसी परिवार का चिराग बुझ गया तो किसी मुखिया। कईयों का सुहाग उजड़ गया। उनमें शराब माफियाओं के साथ सिस्टम की सांठगांठ को लेकर गुस्सा है। वे अधिकारियों को कोस रहे हैं कि अगर धंधेबाजों का संरक्षण नहीं होता उनके साथ इस तरह की अनहोनी नहीं घटती। जहरीली शराब पीने से बीमार 70 से ज्यादा लोगों का देहरादून और हरिद्वार के सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है। सिविल अस्पताल रुड़की में भर्ती 49 लोगों में से 32 की शनिवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें एक के बाद एक छाती में दर्द, धुंधला दिखने, सांस लेने में तकलीफ और उल्टी की शिकायत होने लगी। आनन फानन में इन सभी को देहरादून और हरिद्वार के लिए रेफर किया गया। सभी की हालत नाजुक बताई जा रही है।

उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे सहारनपुर जिले  में जहरीली शराब से होने वाली मौत का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा। तीन थाना क्षेत्रों के 17 गांव में मौत की संख्या 43 से बढ़कर शनिवार शाम तक 80 हो चुकी है। इससे प्रभावित 90 से ज्यादा मरीजों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। जिला प्रशासन ने 46 का पोस्टमार्टम कराया है, हालांकि प्रशासन जहरीली शराब से 36 की मौत का होना ही मान रहा है। पुलिस की तरफ से तीन एफआइआर दर्ज कर करीब 39 की गिरफ्तारी की गईं हैं।

जहरीली शराब ने थाना देवबंद, नागल व गागलहेड़ी क्षेत्र में कोहराम मचा दिया। सहारनपुर से मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए 18 ग्रामीणों ने शुक्रवार की रात दम तोड़ा तो जिला प्रशासन सहम गया। शनिवार शाम तक होने वाली मौत में गांव उमाही में 14, सलेमपुर में 9, ताजपुर में पांच, कोलकी में 14, शरबतपुर में तीन, बढ़ेडी गुर्जर में चार, खजूरी अकबरपुर में दो, पठेड़ में एक, बडोला तीन, गागलहेड़ी में एक, गांव कमाली में एक, देवबंद के गांव नाफेपुर में दो, शिवपुर में चार, खेड़ामुगल में चार, डांकोवाली एक, बिलासपुर में एक, मोहिद्दिनपुर में एक और तल्हेड़ी खुर्द में एक की मौत हो चुकी है। पुलिस द्वारा शराब के खिलाफ चलाए गए अभियान में करीब 400 लीटर लाहन व अवैध शराब जब्त कर 39 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।





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