उधम सिंह नगर (मोहम्मद यासीन)- 15 दिन के भीतर मासूमों से दुष्कर्म की तीसरी घटना सामने आई है वो भी एक ही जिले में। सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि जब एक जिले में ये हालात हैं तो प्रदेश और पूरे देश में क्या हालात होंगे? इस तरह की घटनायें जहां एक ओर केंद्र सरकार के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मिशन पर सवालिया निशान लगा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर राज्य के मुखिया को झकझोरने की कोशिश कर रही हैं जो ऐसी घटनाओं में फांसी की सजा का कानून लाने की घोषणा करके शायद भूल चुके हैं।

15 दिन के भीतर एक ही जिले में मासूम बच्चियों से दुष्कर्म की तीसरी घटना होना बेहद ही शर्मनाक और चिंताजनक है। ये शर्मनाक घटना सामने आई है, ऊधम सिंह नगर के सितारगंज में। जहां एक दरिन्दे ने 4 वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची जब अपनी दुर्दशा को लेकर अपने घर पहुंची तो परिजनों के होश फाख्ता हो गये। परिजनों ने इसकी सूचना सिडकुल चौकी में दी। जिसके बाद पुलिस ने पोक्सो एक्ट में मामला दर्ज करते हुए तत्काल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

इससे पूर्व 20 और 21 जनवरी को 24 घण्टे के भीतर जिले में मासूमों से दुष्कर्म की 2 घटनायें हुई थीं। जिनमें से एक घटना सितारगंज में ही हुई थी और दूसरी काशीपुर के आई. टी. आई. थाना क्षेत्र में हुई थी। दोनों घटनाओं में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

सूबे के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत गत जुलाई माह में भाजपा कार्यसमिति की बैठक में मासूमों से दुष्कर्म की घटनाओं पर फांसी की सजा का कानून बनाने की घोषणा तो कर चुके हैं, लेकिन व्यवहार में अभी कुछ दिखाई नहीं दे रहा है।

ऐसा नहीं है कि मासूमों से दुष्कर्म की घटनाओं की ओर सरकार का ध्यान नहीं है, ध्यान तो है, शायद इसीलिये मुख्यमंत्री ने फांसी की सजा का कानून बनाने की घोषणा की होगी। लेकिन घोषणा के बाद अब तक कानून न बन पाने से ये सवाल खड़ा होता है कि आखिर ऐसे घृणित अपराधों को रोकने के लिये कानून बनाने में इतना विलम्ब क्यों?





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