देहरादून : आज सदन में बजट सत्र के 7वें दिन की कार्रवाही के दौरान नियम 58 के तहत 2016 में गठित राज्य अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग की कार्य प्रणाली का मामला उठा और जिसे कांग्रेस विधान मंडल दल के नेता करण माहरा ने उठाया। सबसे दिलचस्प ये रहा की ये पूरा प्रकरण था तो पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय का लेकिन बैक फुट पर आई वर्तमान सरकार और उसने सदन में कहा की जो भी दोषी होगा सरकार उसके खिलाफ कार्यवाही करेगी.

नए सिरे से परीक्षा करवाई और 196 में से मात्रा 8 अभ्यर्थी ही पास हुए

दरअसल तत्कालीन हरीश रावत सरकार ने राज्य में 2016 में एक अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग बनाया। जिससे राज्य में लोकसेवा आयोग से नीचे की सेवाओं में तत्काल भर्ती से खाली पदों को भरना था। उसने 2016 से भर्ती प्रक्रिया शुरू की और 2016 में 196 पदों पर नियुक्ति भी हो गई। कुछ गड़बड़ी को देखते हुए मामला हाईकोर्ट में गया कोर्ट के निर्देश पर सरकार ने अपर मुख्य सचिव की अगुवाई में तीन लोगों की कमेटी से जाँच करवाई तो पता चला की उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ हुई है। उसके बाद नई सरकार आ गई उसने नियुक्ति रद्द कर नए सिरे से परीक्षा करवाई और 196 में से मात्रा 8 अभ्यर्थी ही पास हुए.

लेकिन जिसने इतनी बड़ी गड़बड़ी की उसके खिलाफ कोई कार्यवाही ही नहीं हुई। इसी बात को लेकर आज विपक्ष ने सत्ता पक्ष को कहा की हम जो कर सकते थे वो हमने किया. करन मेहरा ने कहा कि अब फॉरेंसिक जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करना सरकार का काम है। युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की जाये।





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