समाजवादी पार्टी की लैपटॉप योजना में एक बड़ी हेरफेर का खुलासा हुआ है। योजना के तहत आए करीब 15 लाख लैपटॉप में से करीब 8 लाख 70 हजार लैपटॉप का कोई हिसाब नहीं मिल रहा है। इनकी कीमत करीब 1173 करोड़ रुपए बताई जा रही है। आरटीआई में हुआ खुलासा…

  • लेखक शांतनु गुप्ता की किताब “उत्तर प्रदेश-विकास की प्रतीक्षा में” को लिखने के लिए 2016 में एक आरटीआई फाइल की गई थी।
  • शांतनु बताते हैं कि आरटीआई के मुताबिक 2012 से 2014 तक सपा सरकार ने 14 लाख 81 हजार 118 लैपटॉप खरीदकर प्रदेश के जिलों में भेजे। इनमें से बच्चों को सिर्फ 6 लाख 11 हजार 794 लैपटॉप बांटे गए। बाकी बचे 8 लाख 69 हजार 324 लैपटॉप कहां गए इसकी सरकारी रिकॉर्ड में कोई जानकारी नहीं मिली है।
  • एक समाजवादी लैपटॉप की कीमत 13490 बताई गई है। इसके हिसाब से करीब 1173 करोड़ रुपए कीमत के लैपटॉप गायब हैं।
  • भेजे पूरे, बांटे गए कम
  • आगरा जिले में 38615 लैपटॉप भेजे गए, 16638 बांटे गए।
  • अलीगढ़ में 20293 लैपटॉप भेजे गए, 1224 लैपटॉप बांटे गए।
  • इलाहबाद में 69395 लैपटॉप मंगाए गए, 20341 बांटे गए।
  • अाम्बेडकर नगर में 40177 लैपटॉप मंगाए गए, 7218 बांटे गए।
  • अमेठी में 13165 लैपटॉप पहुंचे, 3820 बांटे गए।
  • बहराइच में 15782 लैपटॉप मंगाए गए, इनमें से सिर्फ 4398 बांटे गए।
    अखिलेश किसी का गलत नहीं चाह रहे थे: सुनील सिंह साजन
  • इस मामले पर सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा, “अगर लैपटॉप बांटने में कोई गड़गड़ी हुई है तो उस वक्त के ऑफिसर दोषी होंगे। योगी सरकार उनकी जांच कराए और जेल भेजे। अखिलेश यादव कहीं से भी किसी का गलत नहीं चाह रहे थे। उनका मकसद सिर्फ इतना था कि हर बच्चे के हाथ में लैपटॉप हो।”

खबर साभार – भास्कर





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