• बिल्डरों के साथ साजिश कर करोड़ों रूपये डकारने का है आरोप

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल । करीब पांच सौ करोड़ के बाजपुर-सितारगंज हाईवे (एनएच-74) मुआवजा घोटाला मामले में मुख्य आरोपित निलंबित पीसीएस डीपी सिंह को हाई कोर्ट से जमानत दे दी गई है। ऊधमसिंह नगर जिले के पूर्व विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी रहे सिंह पिछले 15 माह से जेल में हैं। उधर, इसी घोटाले में जेल में बंद बिल्डर सुधीर चावला की जमानत अर्जी पर हाई कोर्ट पहली मार्च को सुनवाई करेगी।

कुमाऊं आयुक्त रहे डी सैंथिल पांडियन की जांच में एनएच घोटाला उजागर हुआ था। दस मार्च 2017 को यूएस नगर के एडीएम वित्त प्रताप शाह द्वारा तत्कालीन राजस्व व चकबंदी अधिकारियों के खिलाफ पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज होने के बाद पीसीएस अफसर डीपी सिंह ने दो साल पहले 23 नवंबर को मामले की जांच कर रही एसआइटी व ऊधमसिंह नगर के एसएसपी के समक्ष सरेंडर किया था। अगले दिन विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की कोर्ट ने जेल भेज दिया था। इस आदेश को डीपी सिंह द्वारा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं है। उसके अलावा भूमि मुआवजा का निर्धारण विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय द्वारा किया गया। काश्तकारों ने उच्च अधिकारी के समक्ष अपील की तो काश्तकारों को बढ़ी हुई दर के आधार पर मुआवजा दिया गया। बुधवार को न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद डीपी सिंह की जमानत मंजूर कर ली। यहां बता दें कि इस घोटाले की जांच कर रही एसआइटी मुख्य आरोपित डीपी सिंह समेत पीसीएस अफसर तीर्थपाल और नंदन सिंह नगन्याल समेत अन्य 11 अन्य आरोपितों की एंटी करप्शन कोर्ट नैनीताल से जमानत मंजूर हो चुकी है।

मुख्य आरोपित डीपी सिंह पर बिल्डरों के साथ मिलकर एनएच चौड़ीकरण में बैक डेट में कृषि भूमि को अकृषि घोषित करा (143) करोड़ों रुपये डकारने का आरोप है। एसआइटी ने अदालत में सौंपी चार्जशीट में बताया है कि डीपी सिंह द्वारा बिल्डर प्रिया शर्मा व सुधीर चावला के साथ मिलकर देवरिया किच्छा ऊधमसिंह नगर में खसरा-261, 272 प 273 का इकरारनामा सतनाम सिंह के नाम किया। उक्त खसरा नंबर वाली जमीन का 2014 में एनएच चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण किया गया। इसके बाद डीपी के साथ प्रिया व सुधीर के मध्य भूमि का मुआवजा छह हजार प्रति वर्ग मीटर करने को लेकर पत्राचार हुआ। सतनाम सिंह का कहना था कि पत्राचार डीपी, प्रिया व सुधीर के बीच हुआ, उसके द्वारा रेट बढ़ाने के लिए कोई पत्राचार नहीं किया गया। इकरारनामे की शर्त के अनुसार भूमि का मुआवजा द्वितीय पक्ष प्रिया व सुधीर को दिया जाना था। एसआइटी ने पिछले साल 28 जनवरी को एक और मामला दर्ज किया था।





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