पुलवामा आतंकी हमले पर पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के असंगत बयान से प्रदेश सरकार और कांग्रेस पार्टी को शर्मिदा होने के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि हर किसी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और यह सिद्धू पर है कि वह इस पर अपना रुख स्पष्ट करें. मुख्यमंत्री ने कहा, “सिद्धू रक्षा विभाग की पेचीदगियां नहीं जानते और संभवत: उन्होंने अपनी दोस्ताना मंशा से यह प्रतिक्रिया दी होगी.”

उन्होंने कहा कि सिद्धू का आशय बिल्कुल भी राष्ट्रविरोधी नहीं था और उन्हें संदेश मिल गया होगा. मुख्यमंत्री ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर राजनीतिक फायदा उठाने के लिए सोमवार को पंजाब विधानसभा में हंगामा करने का आरोप लगाया.

मुख्यमंत्री ने कहा, “बजट पेश करना एक महत्वपूर्ण कार्यवाही है जिसका प्रदेश की जनता हर साल बेसब्री से इंतजार करती है.” उन्होंने कहा, “ऐसा असंवैधानिक व्यवहार एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी के लिए न सिर्फ अशोभनीय है बल्कि इससे उनकी जन-विरोधी मानसिकता भी झलकती है. उन्हें ना तो सदन की परंपरा का खयाल है और ना ही जनता की भलाई की चिंता.”

अपने दोस्त और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ दोस्ती जताने का कोई भी मौका नहीं गंवाने वाले सिद्धू ने 15 फरवरी को मीडिया से कहा था, “जहां कहीं भी युद्ध होता है और ऐसी घटनाएं (पुलवामा हमला) होती हैं, वहां बातचीत भी जारी रहती है.”

उन्होंने कहा था, “स्थाई समाधान (भारत और पाकिस्तान के मुद्दों) की जरूरत है. ऐसे लोगों (आतंकवादी) का कोई धर्म, देश और जाति नहीं होती. जब कोई सांप काटता है तो उसकी काट भी सांप का जहर होता है.”

सिद्धू ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच बातचीत करने की अपनी दलील को सही भी ठहराया है। सिद्धू ने हालांकि पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले की निंदा की, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ मुठ्ठीभर लोगों के कारण पूरे देश (पाकिस्तान) को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.





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