• हाई कोर्ट नैनीताल में डाली गयी जनहित याचिका के डर से किये निलंबित !
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : प्रदेश सरकार को छोटे आबकारी अधिकारियों को निलंबित करते के बाद आखिटकार बड़े अधिकारियों को जन दबाव के चलते निलंबित करना ही पड़ा। हालाँकि सरकार का कहना है कि जहरीली शराब कांड में कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने पर शासन ने शुक्रवार को हरिद्वार के जिला आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार और सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन दल को निलंबित किया गया है। इनके अलावा पांच अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का फैसला लिया गया है। लेकिन समझा जा रहा है कि आबकारी विभाग पर जहाँ एक तरफ इनको हटाने का जान दबाव था वहीं हाई कोर्ट नैनीताल में डाली गयी उस जन हित याचिका का डर भी था कि कहीं मामला  विभाग पर ही न भारी पड़ जाए।  

हरिद्वार के झबरेड़ा थाना क्षेत्र में आठ फरवरी की सुबह से जहरीली शराब के सेवन से मौत होने का सिलसिला शुरू हुआ था, जो कई दिन तक जारी रहा था। अब तक 37 लोग अपनी जिंदगी से हाथ धो चुके हैं।

हालांकि आबकारी विभाग ने आबकारी महकमे से जुड़े 13 अधिकारियाें और कर्मचारियाें को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए उसी दिन निलंबित कर दिया गया था। जहरीली शराब प्रकरण में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठने के बाद आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने हरिद्वार के जिला आबकारी अधिकारी समेत सात अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश दिए थे।

आबकारी आयुक्त दीपेंद्र चौधरी ने इन अधिकारियों के जवाब को परीक्षण को शासन को भेज दिए थे। शासन ने नोटिस का संतोषजनक जवाब न देने पर जिला आबकारी अधिकारी हरिद्वार प्रशांत कुमार और सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन दल नाथू राम जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

प्रमुख सचिव आबकारी आनंद बर्द्धन ने बताया कि इनके अलावा सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन कैलाश बिंजोला, हरिद्वार के आबकारी उपायुक्त रमेश चौहान, संयुक्त आबकारी आयुक्त गढवाल बीएस चौहान, अपर आबकारी आयुक्त पीएस गर्ब्याल और सहायक आबकारी आयुक्त प्रवर्तन दल गढ़वाल मीनाक्षी टम्टा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। 




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