गुरुवार को जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में शहीद सीआरपीएफ के 44 जवानों की पहचान एक यक्ष प्रश्‍न के रूप में सभी के सामने मुंह बाए खड़ा था.

इस घटना के बाद शोक में डूबे देश की जनता के सामने अहम सवाल यह उठ खड़ा हुआ था कि जवानों के शवों की पहचान कैसे होगा? शहीद परिवार के लोगों कैसे खुद को तसल्‍ली दे पाएंगे कि ये उन्‍हीं का पति, बेटा, भाई या चाचा का शव है. लेकिन सीआरपीएफ के जवानों ने दारुण संकट समय में भी इस काम को बखूबी अंजाद देने का काम किया और सभी शवों की पहचान करने में सफलता हासिल की है.

आधार और आईडी से हुई पहचान दरअसल, सीआरपीएफ ने सूझबूझ का परिचय देते हुए शहीद जवानों के शवों की पहचान उनके आधार कार्ड, आईडी कार्ड और कुछ अन्य सामानों के जरिए ही हो पाई. सीआरपीएफ के अधिकारियों ने बताया कि भीषण विस्फोट की वजह से जवानों से शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए थे. इसलिए उनकी शिनाख्त करना मुश्किल काम था. इन शहीदों की पहचान आधार कार्ड, उनके आईडी कार्ड, पैन कार्ड और उनकी जेबों या बैगों में रखे छुट्टी के आवेदनों से की जा सकी. वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कुछ शवों की शिनाख्त कलाइयों में बंधी घड़ियों और उनके पर्स से हुई है. ये सामान उनके सहयोगी ने पहचाने थे.

आपको बता दें कि जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए वीर जवानों की लिस्ट में 44 जवानों का नाम है. सीआरपीएफ के काफिले में 78 गाड़ियां थीं और करीब 2500 जवान शामिल थे. फिदायीन विस्‍फोट में ये जवान शहीद हो गए थे. उसके बाद से देश भर के लोगों में आक्रोश है.





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