देहरादून(दीपिका रावत) : पुलवामा हमले को भला कोई कैसे भूल सकता है…आज भी जब हमले के बाद की दर्दनाक तस्वीरें मैं देखती हू तो दिल सहम जाता है…सड़कों पर पड़े जवानों के मांस के टुकड़ों और बिखरी शहीद जवानों की बॉडी की तस्वीर देखकर आज भी दिल दर्द से भर जाता है…आंखों में आंसू आ जाते हैं और चेहरे पर फिर से गुस्सा उमड़ पड़ता है…उनके लिए जिन्होंने न जाने ऐसे ही कितने जवानों को बेहरमी की मौत दी. लेकिन हमारे देश के जवान डरे नहीं है बल्कि इस हमले से और जवानों, दोस्तों की शहादत से जवानों का खून और गर्म हो गया है और अब वो पीछे हटने वाले नहीं है…वो औऱ पूरा देश बस बदले की मांग कर रहा है.

उत्तराखंड पुलिस की कांस्टेबल सुनीता नेगी ने बयां किया वो मंजर

वहीं इस हमले का भयानक मंजर कैसा रहा होगा और उस दौरान जवानों के और सुरक्षा बलों के क्या हालात रहे होंगे ये बताने की कोशिश की उत्तराखंड पुलिस की कांस्टेबल सुनीता नेगी ने…जी हां ये पहला मौका नही है जब महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीताने अपनी कलाकारी दिखाई हो इससे पहले भी वो कई चीजों को जिंदा अपनी कलम से कागज पर उतार चुकी हैं. उन्होंने अब्दुल कलाम से लेकर, रेखा, अमिताभ बच्चन, उत्तराखंड डीजी, देहरादून एसएसपी औऱ डीजीपी अनिल रतूड़ी को हुबहू कागज पर अपनी पेंसिल आर्ट से उतारा…जो की काबिले तारीफ है.

पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को अपनी पेंसिल आर्ट के जरिए दी श्रद्धांजलि, भारत माता भी रोई

महिला कांस्टेबल ने पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को अपनी पेंसिल आर्ट के जरिए श्रद्धांजलि दी…जो की हमले का वो मंजर बयां कर रही है…आप देख सकते हैं आर्ट में सुनीता नेगी ने अपना वो दर्द बयां किया है जो वहां गुजरा होगा. और साथ ही शहीदों की शहादत पर भारता माता और देश की कई मांएं भी रोई.

सीएम के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर को कागज पर पेंसिल से उतार कर उन्हें दी थी बधाई

आपको बता दें सुनीता नेगी पुलिस मुख्यालय देहरादून में तैनात हैं. जो हमेशा से अपनी कलाकारी दिखाती आई हैं और सोशल मीडिया पर काफी तारीफें बटौर चुकी हैं. बता दें सुनीता ने सीएम के जन्मदिन पर उनकी तस्वीर को कागज पर पेंसिल से उतार कर उन्हें बधाई दी थी.

शहीद जवानों को और महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीता नेगी को हमारा सलाम

शहीद जवानों को और महिला पुलिस कांस्टेबल सुनीता नेगी को हमारा सलाम….जो की वर्दी पहनकर देश की राज्य की सुरक्षा में तैनात हैं और कई बलिदान दे चुके हैं. इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं है. महिलाएं भी वर्दी धारण कर दुश्मनों के और अपराधियों के छक्के छुड़ाने में आगे  हैं.

दीपिका रावत





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