देहरादून : इसमे कोई दो राह नहीं है की उत्तराखंड के वीर जवानों ने देश की रक्षा के लिए सबसे पहले आगे आकर अपने जान दी है….जब उत्तराखंड से युवा भर्ती में दौड़ने जाते हैं तो उनकी आंखों में अलग ही जज्बा होता है जो की साफ झलकता है…भर्ती के बाद फिर चाहे कहीं भी भेज दो दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सबसे आगे रहे हैं. उत्तराखंड में बीते साल कई जवान शहीद हुए औऱ उत्तराखंड के लोगों ने पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारे बाजी भी की.

पिता शादी के कार्ड बांटने में व्यस्त थे की तभी आई बुरी खबर 

जिसके बाद 14 फरवरी को एक बार फिदे देशभर से पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगे और जंग ए एलान की बात कही. वहीं बीते दिन भी जम्मू सेना का ऑफिसल मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हो गए. जो की बम डिफ्यूज करते हुए वीर गति को प्राप्त हुए. इस खबर से घर में मातम छाया है. क्यों कि घर में चित्रेश बिष्ट की शादी की तैयारियां चल रही थी. पिता शादी के कार्ड बांटने में व्यस्त थे की तभी ये बुरी खबर आ गई.

पिता के बर्थडे पर किया था ऑनलाइन केक ऑर्डर

आपको बता दें चित्रेश बिष्ट के पिता उत्तराखंड पुलिस में इंस्पेक्टर के पद से रिटायर्ड हुए हैं. शुक्रवार को उनका जन्मदिन था। उनका बड़ा बेटा परिवार के साथ यूके रहता है और उनके साथ यहां भाई के बच्चे रहते हैं. उन्होंने बताया कि जन्मदिन पर दिनभर खुशी का माहौल था। शुक्रवार रात को बेटे का फोन आय़ा जिसमें उन्होंने पिता को बर्थडे विश किया था औऱ साथ ही पिता के लिए ऑनलाइन केक ऑर्डर किया था. उन्होंने मां को कहा कि वह 28 फरवरी को छुट्टी आएंगे औऱ शादी की तैयारियों में हाथ बटाएंगे लेकिन ये अब मुमकिन नहीं.

बेटे की शहादत से पूरा परिवार सदमे में, 13 दिन पहले ही गए थे ड्यूटी

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार चित्रेश बिष्ट ने 28 फरवरी को घर आने का वायदा किया था। बेटे के शहादत की सूचना से पूरा परिवार सदमें में है. किसी को याकीन नहीं हो रहा है कि खुशियां कब मातम में बदल गयी. बताया जा रहा है कि 13 दिन पहले ही वो छुट्टी काटकर ड्यूटी पर गए थे…क्योंकि इससे पहले वो ट्रेनिंग में थे.

चित्रेश बिष्ट मूलत रानीखेत के निवासी 

मिली जानकारी के अनुसार चित्रेश बिष्ट मूलत रानीखेत के निवासी है. जो की वर्तमान में नेहरु कॉलोनी में रहते हैं. एसस बिष्ट की नेहरू कॉलोनी में तीन मंजिला कोठी है। बड़ा बेटा विदेश में परिवार समेत रहता है। छोटे बेटे की शादी के लिए भूतल और द्वितीय तल खाली रखा था ताकि शादी के दौरान मेहमानों को रहने में दिक्कत न हो.





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