शुक्रवार को सुप्रीमकोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों में सूचना का अधिकार कानून के तहत महज सेवारत या सेवानिवृत्त नौकशाहों को ही नहीं बल्कि समाज की अन्य धाराओं से भी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की जानी चाहिए.

न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और एस. अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि आवेदन आमंत्रित किए जाने वाले विज्ञापनों में नियुक्ति के लिए निर्धारित शर्तो के साथ पूरी नियुक्ति प्रक्रिया अवश्य पारदर्शी होनी चाहिए.

न्यायमूर्ति सीकरी ने कहा कि सूचना आयुक्तों की चयन समिति के लिए उम्मीदवारों की संक्षिप्त सूची के लिए मानक तय होनी चाहिए.

सुशासन के प्रभाव का उल्लेख करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोग दोनों स्तरों पर सभी रिक्तियां छह महीने के भीतर भरी जाएं.

अदालत ने यह भी कहा कि जहां नियुक्ति की प्रकिया पहले ही शुरू हो चुकी है वहां इसे एक या दो महीने में पूरी की जानी चाहिए.

अदालत ने कहा कि भविष्य की रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया मौजूदा सूचना आयुक्त की सेवानिवृत्ति के दो महीने पहले शुरू की जानी चाहिए.

अदालत ने यह आदेश सूचना का अधिकार कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करते हुए दिया.





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