गूलरभोज : गदरपुर के गुलरभोज नई बस्ती में संजय कुमार का बड़ा बेटा सचिन जो 17 वर्ष का है. कई दिनों से बीमार था. तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने रुद्रपुर में एक निजी चिकित्सालय ले गए. गुर्दे की गंभीर बीमारी का मामला सामने आने पर डॉक्टरों ने डायलिसिस के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया. परिजन एंबुलेंस से ऑक्सीजन का किट लगाकर उसे हल्द्वानी के काठगोदाम रोड स्थित निजी चिकित्सालय ले गए.

इलाज के लिए पहले पैसा जमा करने की कहा अस्पताल प्रबंधन ने बात

वहीं मरीज की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे आईसीयू में डॉक्टरों ने भर्ती करा लिया. इस दौरान परिजनों से फीस जमा करने की बात कही गई, जिस पर मृतक सचिन के परिजनों ने आयुष्मान योजना का कार्ड दिखाया आयुष्मान योजना का कार्ड देखते ही निजी चिकित्सालय के डॉक्टरों के टीम ने इलाज करने से मना कर दिया. आखिर कुछ घंटे बाद सचिन ने दम तोड़ दिया. हालांकि ये निजी अस्पताल सरकार की अटल आयुष्मान योजना से सूचीबद्ध नहीं है. लेकिन इससे एक बात साफ हो गई है कि इंसान में मानवता खत्म होती जा रही है और इंसान अंदर से खोखला हो रहा है.

इंसान की जान से ज्यादा कीमती पैसा

इससे साफ समझा जा सकता है कि निजी चिकित्सालय को सिर्फ पैसा चाहिए इंसान की कीमत उनके सामने कुछ नहीं है. निजी अस्पतालों के लिए इंसान की जान से ज्यादा कीमती पैसा हो गया है…जो की पैसों के लिए इंसान को दम तोड़ता देखते हैं लेकिन उनका दिल नहीं पसीजता.

 





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