ऋषिकेश : एक ओर राज्य की त्रिवेंद्र सराकर बेरोजगारों को नौकरी और बेरोजगारी को खत्म करने का दांवा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ राज्य की जनता के साथ सौतेलेपन का व्यवहार किया जा रहा है जिसकी खबर शायद सरकार को नहीं है. रोजगार तो छोड़ो जो मेहनत लगन से अपने क्षेत्र में काम कर रहे थे उन्ही को बाहर उखाड़ फेंकने की गहरी चाल चली गई है.

कइयों को उम्मीद जगी

ऋषिकेश में जब एम्स बिल्डिंग का निर्माण शुरु हुआ ही था तो तभी से कई बेरोजगारों और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई नवयुवक-युवतियों में रोजगार की उम्मीद जगी…लेकिन उत्तराखंडियों को क्या पता था कि उनके साथ ऐसा अन्याय किया जाएगा. उन्ही के राज्य में उन्ही को बाहर करना अन्याय नहीं तो और क्या.

ऋषिकेश AIIMS में 49 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को निकाला गया

जी हां मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ऋषिकेश AIIMS में 49 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को निकाला गया है. साथ ही खबर है कि ऋषिकेश एम्स के निदेशक ने 49 उत्तराखंड के कर्मचारियों को निकाल कर इन पदों पर अपने करीबियों और बाहरी लोगों को भर्ती करने की रणनीति बनाई है…जिससे उत्तराखंडियों में उबाल है.

                                   उत्तराखंड की मेहनत औऱ भोलेपन का मजाक

उत्तराखंड के लोगों को मेहनती और भोला कहा जाता है लेकिन उन्हें क्या पता था कि उनकी मेहनत और भोलेपन का ऐसा मजाक बनाया जाएगा. जी हां AIIMS ऋषिकेष के पूर्व कर्मचारी का कहना है कि एम्स के निदेशक ने कर्मचारियों के साथ नइंसाफी की है. कर्मचारी ने कहा कि एम्स के निदेशक उत्तराखण्ड के युवाओं को लगातार एम्स से बाहर करने में जुटे है। उन्होंने जानकारी दी की फरवरी में 49 आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को AIIMS से बाहर किया है जबकि अस्पताल में कर्मचारियो की जरुरत है.

सरकार को लेना चाहिए मामले का संज्ञान

अगर सच में ऐसा हुआ है तो सरकार को जरुर इसका संज्ञान लेना चाहिए ताकि राज्य की जनका के साथ अन्याय न हो…वरना जन आंदोलन हो सकता है जिससे फिर से सरकार की परेशानी बढ़ सकती है…क्योंकि पहले ही बाहरी और भीतरी को लेकर घमासान मचा हुआ है.





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