दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बेटे विवेक डोभाल द्वारा दायर मानहानि मामले में वह दो मार्च को अपना फैसला सुनाएगी कि कांग्रेस नेता जयराम रमेश को तलब किया जाए या नहीं. एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने रमेश, ‘द कारवां’ पत्रिका और ‘द डी-कंपनीज’ नामक लेख के संबंध में एक लेखक के खिलाफ मामले में आदेश सुरक्षित रखा.

विवेक डोभाल के वकील डी.पी. सिंह ने अदालत को बताया कि 16 जनवरी को प्रकाशित लेख का शीर्षक अपने आप में ‘निंदनीय’ था और इसने विवेक डोभाल व उनके परिवार के प्रति पाठकों के मन में गलत धारणा पैदा किया.

ऑनलाइन पत्रिका ने कहा था कि ‘विवेक डोभाल केमन आइलैंड्स में एक हेज फंड चलाते हैं, जो एक स्थापित टैक्स हैवेन है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा 2016 में 500 रुपये और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को बंद किए जाने के महज 13 दिन बाद ही इसे पंजीकृत किया गया था.’

विवेक डोभाल ने शिकायतकर्ता गवाह के रूप में गवाही देते हुए अदालत को पहले बताया था कि ‘डी कंपनी’ भारत के सबसे वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम के लिए गढ़ा गया शब्द है, जबकि सिंह ने कहा कि हेज फंड रातोंरात या कुछ दिनों में स्थापित नहीं किया जा सकता है.

वकील ने यह भी कहा कि जयराम रमेश ने भी एक संवाददाता सम्मेलन में लेख का हवाला दिया और विवेक डोभाल के खिलाफ मानहानिकारक आरोप लगाए. अदालत से कहा गया कि आरोपों से विवेक डोभाल की प्रतिष्ठा और करियर को ‘अपूरणीय क्षति’ हुई है.





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