नेशनल कांफ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि एक सोची-समझी साजिश के तहत एक पूरी कौम को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. कश्मीरियों को निशाना बनाया जा रहा है. हमारे जो बच्चे-बच्चियां बाहर के यूनिवर्सिटी में तालीम (शिक्षा) हासिल करने गए, उन्हें निशाना बनाया गया.

मेरी चिंता मुख्यधारा के राजनीतिक ऑपरेटरों को सुरक्षा वापस लेने के बारे में है. एक तरफ, आप हमें बता रहे हैं कि हमें संसद और विधानसभा चुनावों के लिए तैयार रहना है, दूसरी ओर, आप हमें बता रहे हैं कि अब हम राज्य के संरक्षण के लायक नहीं हैं

पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला हम कभी भी हिंसा और आतंक के पक्ष में नहीं रहे हैं, हम केवल बातचीत के जरिए समाधान के लिए संकल्पित हैं. जब हम बातचीत की बात करते हैं तो हम देश विरोधी हो जाते हैं, लेकिन सऊदी अरब के साथ संयुक्त बयान में, दोनों नेता समग्र वार्ता के बारे में बात करते हैं

सुरक्षा वापस लिए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सुरक्षा वापस लेना एक प्रतिगामी कदम है जो केवल घाटी में राजनीतिक गतिविधि को कमजोर करेगा. उन्होंने कहा कि मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह कदम केंद्रीय और राज्य की खुफिया एजेंसियों के इनपुट्स को ध्यान में रखे बिना उठाया गया. जिसका अर्थ केवल यह हो सकता है कि यह राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया हो.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब मुख्यधारा के राजनीतिक दलों को अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और कट्टरपंथी और हिंसा का समर्थन करने वाली ताकतों का मुकाबला करने के लिए लोगों के साथ अधिक से अधिक संपर्क बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं इस कदम पर पुनर्विचार करने के लिए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल को प्रोत्साहित करना चाहूंगा. यदि इसका पुनरीक्षण नहीं किया जाता है तो हम अदालतों का रुख करेंगे और उनसे हस्तक्षेप करने के लिए कहेंगे.





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