प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शुक्रवार को सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया. उन्होंने यह पुरस्कार भारत के लोगों को समर्पित किया और इसकी धनराशि को नमामि गंगे फंड में दान कर दिया. पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अभार व्यक्त करते हुए मोदी ने कहा, मेरा मानना है कि यह पुरस्कार मेरा नहीं, बल्कि भारत के लोगों का है.

यह 1.3 अरब भारतीयों की शक्ति व कौशल से पांच सालों से कम समय में हासिल की गई भारत की सफलता का है व उनकी तरफ से मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूं और आभार व्यक्त करता हूं. उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार उस दर्शन को मान्यता है, जिसने विश्व को वसुधैव कुटम्बम का संदेश दिया.

उन्होंने कहा, यह उस संस्कृति के लिए है, जिसने युद्ध के मैदान में भी शांति का संदेश दिया. महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के दौरान भगवद गीता का उपदेश दिया. प्रधानमंत्री ने कहा, सियोल शांति पुरस्कार उस भूमि के लिए है जो हर जगह आकाश, अंतरिक्ष, सभी ग्रहों, प्रकृति में शांति की कामना करती है.

उन्होंने कहा, यह पुरस्कार उन लोगों के लिए है, जिन्होंने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर समाज को रखा है. और मैं सम्मानित महसूस करता हूं कि यह मुझे इस साल मिला है, जब हम महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे.

पुरस्कार की राशि को नमामि गंगे फंड में दान देते हुए मोदी ने कहा, मैं इस मौद्रिक पुरस्कार 200,000 डॉलर (एक करोड़ तीस लाख रुपये) की राशि को नमामि गंगे फंड में गंगा की सफाई के लिए दान करता हूं, जो लाखों लोगों की आर्थिक जीवनरेखा है.





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