• पुल के न होने पहाड़ों में स्कूली छात्रों को जान हथेली पर करना पड़ता है आवागमन 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

सतपुली (पौड़ी गढ़वाल): उत्तराखंड के अस्तित्व में आने के 18 वर्ष बाद भी सूबे के गांवों और इन गांवों से विद्यालयों तक जाने के मार्गों और नदी नालों पर पुल तक नहीं बन पाए हैं. परिणामस्वरूप आज भी पहाड़ों में स्कूली छात्रों को जान हथेली पर रखकर आना -जाना पड़ रहा है इसी दौरान कई बार पहाड़ की इन माँ बहनों और बच्चियों के साथ नदी -नालों में गिरने से या पैर फिसल जाने से अकाल मौत भी हो रही है। 

आज प्रातः स्कूलों जा रहीं दो छात्रों की पुल के न होने के चलते पूर्वी नयार नदी में अस्थायी पुल से गिरने के चलते दुर्घटना हो गयी जिसमें एक छात्रा की पूर्वी नयार नदी में बहने से एक छात्रा की मौत हो गई  जबकि, दूसरी छात्रा की तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि देर शाम तक भी छात्रा का नदी में कोई पता नहीं चल पाया है। दोनों छात्राएं नदी पार कर स्कूल जा रही थीं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार थैलीसैण के बीरोंखाल प्रखंड अंतर्गत ग्राम बापता निवासी कक्षा नौ की छात्रा अमीषा (14) पुत्री दिनेश सिंह और कक्षा छह की छात्रा नेहा (11) पुत्री शिशुपाल सिंह राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जिवई में पढ़ती थी। शुक्रवार (आज) सुबह करीब साढ़े आठ बजे दोनों छात्राएं पूर्वी नयार नदी पर लकड़ी डालकर बनाए गए अस्थायी रास्ते से स्कूल जा रही थीं। इसी दौरान पैर फिसलने से नेहा नदी में गिर गई।

अपनी सहेली को बचाने के प्रयास में अमीषा भी नदी के तेज बहाव में बह गई। सूचना पर पहुंचे ग्रामीण अमीषा को नदी से बाहर निकालकर सीएचसी बीरोंखाल ले गए, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, सूचना के बाद जल पुलिस ने लापता छात्रा की तलाश में कई घंटे तक अभियान चलाया, लेकिन समाचार लिखे जाने छात्रा का कोई सुराग नहीं लग पाया। देर शाम होने के चलते खोज अभियान रोक दिया गया है। 

इधर घटना की सूचना मौके पर उप जिलाधिकारी योगेश मेहरा व अन्य अधिकारी डेरा डाले हुए हैं। हालाँकि आवागमन के लिए नदी पर झूला पुल बना हुआ है। लेकिन इसके लिए दो किलोमीटर घूमकर जाना पड़ता है, इसलिए ग्रामीणों ने नजदीक का रास्ता बनाते हुए शिव मंदिर के निकट नदी पर पेड़ डालकर अस्थायी पुलिया बनाई हुई है, जिससे ग्रामीण आर-पार होकर अपनी आवागमन करते हैं।





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