कश्मीर में आतंकी हमले में हमारे देश के 40 जवान शहीद हुए जिसमे दो उत्तराखंड के भी जवान शामिल थे. जवानों की शहादत को देश कभी भूल नहीं सकता. आतंकी समर्थक भले ही सेना व सुरक्षाबलों के खिलाफ कितना भी अभद्र टिप्पणी कर लेकिन घाटी के युवाओंं ने फौजी बनकर देश सेवा करने का जो जज्बा दिखाया वो उन लोगों के मुंह पर तमाचा मारने जैसा है… आतंकी समर्थक कश्मीरी युवकों के मन में देश के प्रति प्रेम को कम नहीं कर पाए.

सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के पांच दिन बाद उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले में भर्ती रैली

जी हां पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले के पांच दिन बाद उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के श्रीगुंतमुला में मंगलवार को 161 टेरिटोरियल आर्मी की ओर से भर्ती रैली का आयोजन किया गया। युवाओं में फौजी बनने का जुनून सिर चढ़कर बोला और 111 पदों के लिए क्षेत्र के 2500 युवाओं ने पूरा दमखम लगा दिया। ऐसा कर युवाओंं ने सेना विरोधी लोगों को और आतंकियों की पनाह लेने वालों के मूंह में तमाचा मारा.

असामजिक तत्व ने की कुछ झूठी अफवाह फैलाकर देश का माहौल खराब करने की कोशिश

गौर हो की बीते दिनों पुलवामा में हुए हमले के बाद कई राज्यों में शहीदों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने को लेकर कश्मीरी छात्र-छात्राएं निशाने पर आई थी…जिन्हें कॉलेज से निलंबित भी किया गया. साथ ही कुछ युवक वापस अपने मुल्क लौट गए…लेकिन कुछ ऐसे असामजिक तत्व भी थे जो झूठी अफवाह फैला कर देश का माहौल खराब करने में लगे थे..जिनके मुंह पर करारा तमाचा आज कश्मीरी युवकों ने मारा.

सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहता है- कश्मीरी युवक

भर्ती होने आए कश्मीरी युवा बिलाल अहमद ने कहा कि वे सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहता है। सेना में शामिल होकर वे अपने परिवार को भी अच्छा जीवन दे सकता है। इससे ज्यादा किसी को क्या चाहिए। वहीं कश्मीर में बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कुछ अन्य युवाओं ने कहा कि रिक्त पदों को बढ़ाकर अधिक युवाओं को सेना में भर्ती होने का मौका दिया जाना चाहिए।

इंडियन आर्मी में कश्मीरी सैनिक शहीद

सेना में शामिल होने के लिए कश्मीरी युवाओं का जोश इस लिए भी अहम है, क्योंकि कश्मीर में देश विरोधी तत्व युवाओं को सेना में भर्ती न होने की धमकियां देते हैं। बीते वर्ष आतंकवादियों ने कश्मीर के सैनिक मुख्तार अहमद, पुंछ के राइफलमैन औरंगजेब और 22 वर्षीय लेफ्टिनेंट उमर फैयाज को शहीद कर दिया था। आतंकियों के हमले भी स्थानीय युवाओं के फौजी बनने के हौसले पस्त नहीं कर पाए हैं।





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