जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक द्वारा पीडीपी को ‘डूबता जहाज’ कहने के अगले दिन गुरुवार को पार्टी ने उन पर उनके संवैधानिक पद की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के वरिष्ठ नेता सरताज मदनी ने मलिक के बयान पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि स्थिति इतनी चिंताजनक हो गई है कि राज्यपाल का कार्यालय एक मजाक बन गया है.

मदनी ने एक बयान में कहा, यह दुखद है कि कार्यभार संभालते के बाद से ही मलिक प्रत्येक टीवी चैनल और समाचार पत्र में बिना तथ्यों की जांच-पड़ताल किए बयान दे रहे है. उन्होंने कहा, राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है और इसकी गरिमा होती है. एक राज्यपाल से उम्मीद की जाती है कि वह बिना डर और पूर्वाग्रह के निष्पक्ष कार्रवाई करे.

पीडीपी नेता ने कहा, हालांकि, जम्मू एवं कश्मीर में पिछले कुछ महीनों से राजभवन द्वारा स्पष्ट पक्षपात होता दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा, राज्यपाल राजनीतिक बयान दे रहे हैं और जनता को विशेष राजनीतिक दल के लिए प्रोत्साहित कर रहे है.

उन्होंने अपने बयान में राज्यपाल को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभाने और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी राजनीतिक दलों पर छोड़ने के लिए कहा.

मलिक ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा था कि पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को कोई गंभीरता से नहीं लेता है क्योंकि उनकी पार्टी टूट रही है और वे भारत-विरोधी भावनाएं जगाकर अपनी पार्टी के डूबते जहाज को बचाने की कोशिश कर रही है.





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