• कुष्ठ रोग को जड़ से मिटाने के लिए हंस फाउंडेशन ने बनाया राहत कोष
  • विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर अल्मोड़ा और कोटद्वार में नि:शुल्क शिविर
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून : देश भर में स्वास्थ्य-शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध हंस फाउंडेशन समाज सेवी माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज की प्रेरणा से निरंतर उन लोगों के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति सजगता के साथ कार्य कर रहा है। जिन लोगों को वास्तव में आज के समय में स्वास्थ्य और शिक्षा की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। यह सब इस लिए भी जरूरी हैं कि माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज जी ऐसे लोगों के प्रति उदारता पूर्वक सेवा देने में दृढ़ संकल्पता के साथ आगे बढ़ रहे है।
इस कड़ी में हंस फाउंडेशन ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा और कोटद्वार में अक्टूबर 2018  टीएलएम के साथ 14 चिकित्सा शिविरों का आयोजन किया । जिसके तह्त कोटद्वार में नौ और अल्मोड़ा में 37   कुष्ठ रोगियों का इलाज किया जा रहा है। इन रोगियों के परिवार से कुष्ठ रोग जांच हेतु खून के नमूने लिए गए थे। जिसके माध्मय से जानकारी प्राप्त हुई थी कि इन परिवारों के दूसरे सदस्यों को भी यह रोग प्रभावित कर रहा है। जिसके बाद डाक्टरों द्वारा इन परिवारों का इलाज चल रहा है।
हंस कल्चर सेंटर दिल्ली के महा प्रबंधक धर्मा राव ने बताया कि माताश्री मंगला जी एवं श्री भोलेजी महाराज जी की प्रेरणा से कुष्ठ रोगियों के इलाज एवं भविष्य में इस रोग के निवारण हेतु हंस फाउंडेशन ने अलग से एक राहत कोष बनाया गया है।  इस दिशा में 30 जनवरी को विश्व कुष्ठ रोग दिवस पर अल्मोड़ा और कोटद्वार में नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। साथ ही कुष्ठ रोगियों को सामाजिक भेदभाव की रोकथाम के लिए प्रयत्नशील रहने के लिए प्रेरित किया गया। 
इसी तरह अक्टूबर में ही अल्मोड़ा में हंस फाउंडेशन के सौजन्य से एक नेत्र शिविर और सामान्य चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में भी हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों  की आँखों और स्वास्थ्य की निःशुल्क जांच की गई। इस शिविरि में पच्चीस लोगों की स्वास्थ्य की जांच के बाद कुछ मरीजों में अल्सर की शिकायत पाई गई और तीन रोगियों को छोड़कर बाकि के सभी मरीजों के हाथ-पांव में कुष्ठ रोग के लक्ष्ण पाए गए। साथ ही इनकी आंखों में परेशानी थी। जिनका इलाज हंस फाउंडेशन के माध्यम से टीएलएम द्वारा किया गया। इन मरीजों का भविष्य सुरक्षित हो और यह बीमारी आगे न बढ़े इसकी सुरक्षा के लिए इन्हें दवाइयां,जूते,दस्ताने  और स्वयं देखभाल किट भी वितरित की गई। इसी के साथ इन कुष्ठ रोगियों को फिजियोथेरेपी भी कराई जाती है। उन्हें बताया जाता है कि किसी तरह से उन्हें अपना ख्याला रखना हैं,किस तरह का भोजन करना हैं,किस तरह से कपड़े पहनने है।  साथ ही विश्व कुष्ठ रोग दिवस के अवसर पर कुष्ठ रोगियों के लिए हंस फाउंडेशन एवं टीएलएम द्वारा स्व-देखभाल सिखाने के साथ-साथ दवाओं के वितरण के साथ सहभागिता सत्र देने और शॉल, स्टोल्स के वितरण के साथ-साथ स्वास्थ्य और मन की शांति बनाए रखने के लिए दैनिक अभ्यासा भी कराया जाता है। इसी के साथ आम लोगों को इन लोगों से जोड़े रखने के लिए यह भी सुनिश्चित किया जाता हैं कि कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता है।
श्री राव ने बताया कि हंस फाउंडेशन द्वार आयोजित इन चिकित्सा शिविरों में आएं आंखों के मरीजों को चश्मे तो प्रदान तो किए ही गए। साथ ही इन मरीजों का मोतियाबिंद का आपरेशन भी नि:शुल्क करवाया जा रहा है। माताश्री मंगला जी एवं श्री भोले जी महाराज के आशीष से उत्तराखंड सहित देश के अनंयत्र क्षेत्रों में निरंतर इस तरह के स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जिनमें मरीजों को निःशुल्क दवाइयां,चश्में और तमाम दूसरी जरूरत की सामग्री प्रदान की जा रही है। कुष्ठ रोगियों को आम जन-जीवन से जोड़ने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि ऐसे लोग मुख्य धरातल पर लौट कर अपना जीवन खुशी से जी सकें।




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