शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक पाकिस्तानी आतंकवादी समूह फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिस पर विभिन्न हवाला चैनलों की मदद से धन शोधन में संलिप्तता का आरोप है.

ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा सितंबर 2018 में दर्ज मामले के आधार पर धनशोधन निवारक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है.

वित्तीय जांच एजेंसी धन को किस प्रकार इधर से उधर किया गया इसका पता लगाएगी, क्योंकि अभियुक्तों ने आपराधिक गतिविधियों के अलावा धनशोधन का भी काम किया है.

एनआईए ने 26 सितंबर 2018 को दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र से मोहम्मद सलमान को गिरफ्तार किया था, जो दुबई में रहनेवाले एक पाकिस्तानी से निरंतर संपर्क में था, जो कि एफआईएफ के उपप्रमुख से जुड़ा था. यह आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़ा संगठन है.

एनआईए के मुताबिक, सलमान पर आरोप है कि उसने एफआईएफ के ऑपरेटर से हवाला के जरिए रकम हासिल की.

एनआईए ने अपनी एफआईआर में दावा किया है कि आरोपी और अन्य लोगों को पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के विभिन्न लोगों से लगातार धन प्राप्त हुए और इस धन का इस्तेमाल भारत में आंतकवादी गतिविधियों को चलाने के लिए किया गया.

एजेंसी ने अपनी जांच के दौरान 1.56 लाख रुपये और 43,000 नेपाली रुपये जब्त किए थे. इसके अलावा 14 मोबाइल फोन, पांच पेन ड्राइव और अन्य भ्रामक दस्तावेज जब्त किए थे.

एनआईए ने सलमान के अलावा एफआईएफ का हवाला कारोबार चलानेवाले मोहम्मद सलीम उर्फ मामा को गिरफ्तार किया, जो मध्य दिल्ली के दरियागंज का निवासी है. साथ ही श्रीनगर के रहनेवाले हवाला कुरियर सज्जाद अब्दुल वानी को गिरफ्तार किया.

एनआईए के मुताबिक लाहौर की संस्था एफआईएफ की स्थापना जमात-उद-दावा ने की है और यह लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करता है.

इसकी स्थापना 1990 में हाफिज सईद ने की थी, जो 2008 के मुंबई हमले का मास्टरमाइंड है.





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