सोमवार को इंटरनेश्नल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कुलभूषण जाधव मामले में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने -सामने हैं. ये सुनवाई हेग स्थित इंटरनेश्नल कोर्ट ऑफ जस्टिस में सोमवार (18 फरवरी ) से 4 दिन के लिए चलेगी. इस सुनवाई में दोनों देश बारी -बारी से अपना पक्ष रखेंगे और 21 फरवरी को कोर्ट अपना अंतिम फैसला सुनाएगा.

सोमवार को आईसीजे में आज पहले दौर की सुनवाई हो रही है. यह सुनवाई दोपहर ढाई बजे से लेकर शाम पांच बजे तक चलेगी. भारत की तरफ से मशहूर वकील हरीश साल्वे पाकिस्तान का झूठ सामने रख रहे हैं. हरीश साल्वे वियना संधि की शर्तों की व्याख्या करते हुए पाकिस्तान को घेर रहे हैं। साल्वे अपनी दलीलों में वियना संधि के विभिन्न आर्टिकल्स का जिक्र कर रहे हैं और बता रहे हैं कि पड़ोसी मुल्क कैसे उनके देश के एक निर्दोष नागरिक की जान लेने पर आमादा है. जाधव मामले में राजनयिक संपर्क पर वियना संधि के उल्लंघन सहित केवल दो मूल मुद्दे हैं.

उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेश नहीं है कि पाकिस्तान कुलभूषण का इस्तेमाल एक प्रोपागेंडा टूल के रुप में कर रहा है. पाकिस्तान बिना देर किए काउंसलर एक्सेस देने के लिए बाध्य था.

साल्वे ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को 30 मार्च 2016 को काउंसलर एक्सेस के अपने अनुरोध को याद दिलाया था लेकिन कोई जवान नहीं मिला. भारत द्वारा विभिन्न तारीखों पर रिमाइंडर भेजे गए.

उन्होंने कहा कि 19 जून 2017 को भारत ने जांच में सहायता के अनुरोध का जवाब दिया और कहा कि न केवल जाधव को कांसुलर एक्सेस से वंचित किया गया था, बल्कि पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के किसी भी कार्य में अपनी भागीदारी दिखाने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत नहीं दिया गया है.

उन्होंने आगे कहा कि उनकी (जाधव की) कथित स्वीकारोक्ति स्पष्ट रूप से सहमी हुई प्रतीत होती है. भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया था कि यह पाकिस्तान सरकार है जिसने आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता को लेकर सार्क सम्मेलन में पुष्टि नहीं की है.

साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने जाधव के परिवार को उनसे मिलने की अनुमति देने की पेशकश की, शर्तों पर सहमति बनी और बैठक 25 दिसंबर, 2017 को आयोजित की गई. भारत ने जाधव के परिवार के साथ बैठक आयोजित करने और 27 दिसंबर को पत्र लिखकर विरोध जताया गया था. जाधव के परिवार के साथ बैठक आयोजित करने के तरीके को लेकर भारत की ओर से 27 दिसंबर को पत्र लिखकर विरोध जताया गया था.

वहीं दूसरी सुनवाई मंगलवार को दोपहर ढाई बजे से लेकर पांच बजे तक चलेगी. इस मे पाकिस्तान अपनी बात रखेगा. उसके बाद दो दिन तक और ये सिलसिला चलेगा और 21 फरवरी को दोनों पक्षों के बयान और तर्क सुनने के बाद कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा.

आईसीजे में अगले चार दिन चलने वाली सुनवाई में दो मुद्दों पर बहस होगी. पहला, विएना संधि का उल्लंघन और दूसरा, सजा देने के मामले में पाकिस्तान का अधिकार क्षेत्र क्या है. कोर्ट दोनों देशों का पक्ष सुनने के बाद अपना अंतिम फैसला सुनाएगा. कोर्ट में कुलभूषण जाधव का मामला 2016 से अटका हुआ है. पाकिस्तान का दावा है कि उसने जाधव को जासूसी के आरोप में 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया.

जाधव पर ये आरोप भी लगे हैं कि उन्होंने ईरान के रास्ते अवैध तरीके से पाकिस्तान में प्रवेश किया. पिछले साल 25 मार्च को पाकिस्तान ने जाधव का एक कथित गोपनीय बयान जारी किया जिसमें जाधव यह कहते सुने गए कि वे इंडियन नेवी के कार्यरत अधिकारी हैं और उस वक्त वे भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनलिसिस विंग (रॉ) के लिए काम कर रहे थे. पाकिस्तान ने उनपर आतंकवाद फैलाने, चीन-पाकिस्तान कॉरिडोर और ग्वादर पोर्ट के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया है. इन्हीं बयानों के आधार पर पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने 10 अप्रैल 2017 को जाधव को मौत की सजा सुनाई.





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