आशीष तिवारी। उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट www.uttarakhand.bjp.org में गलतियों की भरमार है। न सिर्फ गलतियां हैं बल्कि डिजीटल इंडिया का नारा देने वाली पार्टी की वेबसाइट जिस स्वरूप में होनी चाहिए वो स्वरूप और गंभीरता भी उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट में नहीं दिखती। तभी तो हम कह रहें हैं कि अजय भट्ट अब भी नेता प्रतिपक्ष हैं और सुरेंद्र नेगी का चेहरा बदल गया है।

उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट http://www.uttarakhand.bjp.org में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट को अब भी नेता प्रतिपक्ष बताया गया है। जाहिर है कि उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट को अपडेट नहीं किया गया है। जबकि अजय भट्ट तो अब विधायक भी नहीं हैं। न सिर्फ अजय भट्ट को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बताया जा रहा है बल्कि उनके बारे में लिखे लेख में वर्तनी की कई अशुद्धियां हैं। मानों किसी नौसिखिए के जरिए अजय भट्ट के बारे में लेख लिखवाया गया और उसे किसी वरिष्ठ नेता से जांच कराए बिना ही वेबसाइट पर अपलोड कर दिया। हम यहां अजय भट्ट को नेता प्रतिपक्ष बताने वाली बीजेपी की वेबसाइट का स्क्रीन शॉट साझा कर रहें हैं जो हमने 30 जनवरी को लिया था और फिलहाल खबर लिखे जाने तक यही स्थिती बनी हुई है। 

उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट पर अटल जी के निधन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। न ही उनको किसी तरह से इस वेबसाइट पर श्रद्धांजलि दी गई है। वेबसाइट पर अटल जी के बारे में नेतृत्व वाले कॉलम में जरूर लिखा गया है लेकिन इस लेख में भी अटल जी की मृत्यु कब हुई ये नहीं बताया गया है। जबकि केंद्रीय बीजेपी की वेबसाइट में अटल जी के लिए एक अलग सबडोमेन ही बनाया गया है जो बीजेपी की मुख्य वेबसाइट से लिंक है। इस लिंक को क्लिक करते ही आप http://www.bjp.org/ataljiamarrahen/ पर डायरेक्ट हो जाते हैं और आपको अटल जी की तस्वीरों से लेकर उनकी राजनीति और साहित्य के बारे विस्तृत जानकारी मिल जाएगी। उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट बनाने वालों को मानों ये पता ही नहीं कि अटल जी का निधन हो चुका है।

उत्तराखंड की वेबसाइट में गलतियां भी ऐसी कि जिन्हें सुनकर बीजेपी के सामान्य ज्ञान पर हंसी आ जाए। अब उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट पर राज्य में उसके विधायकों के बारे में दी गई जानकारी को ही ले लीजिए। विधायकों की जो फोटो दी गई है उसमें कर्णप्रयाग से सुरेंद्र सिंह नेगी को बीजेपी ने विधायक बताया है और तस्वीर लगा दी गई है कांग्रेसी सुरेंद्र सिंह नेगी की। हैरानी ये है कि उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट पर इतनी बड़ी गलती पिछले काफी समय से चली आ रही है लेकिन बीजेपी के किसी नेता ने नहीं देखा। जाहिर है कि उत्तराखंड बीजेपी के लिए डिजीटल इंडिया का नारा महज नारा भर है। वो खुद न डिजीटल है और न ही इसे गंभीरता से लेती है। हम यहां ये स्क्रीन शॉट लगा रहें हैं।

बीजेपी ने नामित विधायक को अपनी पार्टी का विधायक गिन लिया है। जबकि आमतौर पर नामित विधायक किसी पार्टी विशेष का नहीं माना जाता।

उत्तराखंड बीजेपी नकल करने में भी अक्ल का इस्तमाल नहीं कर पाई। मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाने के लिए उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट पर जो इन्फोग्राफिक दिखाए गए हैं वो उत्तर प्रदेश बीजेपी की वेबसाइट से लिए गए हैं। इन इन्फोग्राफिक्स में उत्तर प्रदेश की बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं की तस्वीरें लगीं हैं। उत्तराखंड बीजेपी ने इन इन्फोग्राफिक्स को उत्तर प्रदेश के नेताओं की तस्वीरों के साथ ही अपनी वेबसाइट पर लगा दिया है। मानों उसके पास उत्तराखंड में कोई नेता ही न हो। हालांकि ये जांच का विषय हो सकता है कि ये जानबूझकर किया गया या फिर भूलवश हो गया। स्क्रीन शॉट देखिए – 

उत्तराखंड बीजेपी की वेबसाइट पर पार्टी के नवीनतम कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा नहीं की गई है। यहां तक कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के त्रिशक्ति सम्मेलन में शिरकत करने देहरादून आने के बारे में एक भी जानकारी साझा नहीं की गई। न ही तस्वीरों को अपडेट किया गया है। वेबसाइट पर साझा तस्वीरें फरवरी 2018 की हैं और अधिकतर एक ही आयोजन की हैं। ऐसा लगता है मानों ये तस्वीरें जानबूझकर लगाई गईं हों। वेबसाइट पर दी गई फोटो गैलरी में भी पुरानी तस्वीरें ही मिलेंगी। फोटो गैलरी की कुल बीस फोटोज में से आठ तस्वीरें मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की प्रोफाइल फोटोज हैं। दो फोटोज सोशल मीडिया और आईटी प्रभारी भुवन जोशी ने अपनी ही लगवा रखीं हैं। एक तस्वीर दिसंबर 2017 की है, एक तस्वीर 11 फरवरी 2018 की है। पांच तस्वीरें सोशल मीडिया संवाद की हैं। बाकी बची तीन तस्वीरों में से एक इन्वेस्टर्स समिट की है, एक किसी अन्य आयोजन है जिसमें अमित शाह नजर आ रहें हैं जबकि एक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ रैली की तस्वीर है। संगठन की वेबसाइट पर संगठन के कार्यों से जुड़ी तस्वीरें आपको तलाशने से भी नहीं मिलेंगी। वेबसाइट पर इतनी गलतियों के बारे में हमने बीजेपी के सोशल मीडिया प्रभारी भुवन जोशी से वेबसाइट पर दिए नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।





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