देहरादून : पुलवामा में हुए आतंकी हमले के 48 घंटे बीते भी नहीं थे की उत्तराखंड का एक और लाल देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हो गया. मिली जानकारी के अनुसार चित्रेश बिष्ट को 21 जीआर इंजीनियरिंग कोर में तैनाती मिली। कैप्टन से मेजर पद पर प्रमोशन पाने के बाद चित्रेश इन दिनों राजौरी जिले के नौशेरा के झंगड़ सेक्टर में एलओसी पर तैनात थे। यहां शनिवार को पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम की ओर से बिछाई गई आइईडी को डिफ्यूज करते समय हुए विस्फोट में मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हो गए। उनके शहीद होने की सूचना जैसे ही उनके घर पहुंची, घर में कोहराम मच गया। मेजर चित्रेश की दून में सात मार्च को शादी होनी थी। इसके लिए सभी जगह कार्ड बंट गए थे।

परिजनों से हुई सेना अधिकारियों की बात के अनुसार रविवार सुबह पार्थिव शरीर जम्मू स्थित इंजीनियरिंग कोर के शिविर में लाया जाएगा। जहां सेना के अफसर मेजर बिष्ट को सैन्य सम्मान और सलामी देंगे। इसके बाद सेना के जहाज से पार्थिव शरीर दून पहुंचेगा। देर शाम तक पार्थिव शरीर पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद ही सोमवार को हरिद्वार में अंतिम संस्कार होगा।

आइईडी डिफ्यूज में माहिर थे चित्रेश

मिली जानकारी के अनुसार देहरादून निवासी मेजर चित्रेश बिष्ट ने इंजीनियरिंग करने के बाद कई मेडल हालिल किए थे. यही कारण था कि वह हमेशा तकनीकी के रूप में दूसरे अफसरों से आगे रहते थे। महज सात साल की नौकरी में मेजर चित्रेश ने 30 से ज्यादा आइईडी को डिफ्यूज किए थे। शनिवार को भी वह चार आइईडी डिफ्यूज करने में सफल रहे थे। मगर, पांचवें आइईडी में ब्लास्ट होते ही वह शहीद हो गए।





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